वैदिक गुरुकुल का भव्य शुभारम्भ, गूंजे वैदिक मंत्र

ललित दाधीच
राजलदेसर (नवयत्न) । राजलदेसरभगवती भद्रकाली शक्ति पीठ वैदिक सनातन संस्कृति संरक्षण संस्थान के विशाल प्रांगण में वैशाख शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर वैदिक मंत्रों के दिव्य उच्चारण के साथ वैदिक गुरुकुलम् का भव्य शुभारम्भ संपन्न हुआ। इस अवसर पर महागणपति पूजन, सप्तमातृका पूजन, वास्तु शांति एवं गृह शांति जैसे धार्मिक अनुष्ठान विधिवत सम्पन्न कराए गए। वैदिक शिक्षा ग्रहण करने वाले बटुकों का संस्थान में मंगल प्रवेश भी कराया गया। समस्त पूजन कार्य आचार्य पं. जीवनकिशोर सामवेदी के निर्देशन में सम्पन्न हुए। द्वितीय सत्र में आयोजित विद्वत संगोष्ठी को संबोधित करते हुए दण्डी स्वामी आनंदाश्रम महाराज ने कहा कि सनातन मंत्र विज्ञान अत्यंत समृद्ध एवं प्रभावकारी है। उन्होंने कहा कि अनेक यंत्र जिस कार्य को करने में असमर्थ रहते हैं, उसे एक मंत्र के माध्यम से संभव किया जा सकता है। उन्होंने समय, संपत्ति और मन को भगवद् कार्यों में लगाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इससे व्यक्ति का इहलोक और परलोक दोनों सार्थक होते हैं। साथ ही उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा हेतु वैदिक विद्यालयों की स्थापना को अनिवार्य बताया। भागवताचार्य लक्ष्मण ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह विडम्बना है कि जहां वेदों का उद्गम हुआ, वहीं आज वेद विद्या उपेक्षित होती जा रही है। पूर्व काल में वैदिक परंपराओं का संरक्षण राजा-महाराजाओं द्वारा किया जाता था, जबकि वर्तमान में यह जिम्मेदारी संत समाज के कंधों पर है। उन्होंने गुरुकुल व्यवस्था को वर्णाश्रम धर्म के प्रथम सोपान के रूप में आवश्यक बताते हुए पुरुषार्थ चतुष्टय की विस्तृत व्याख्या की।
पंडित बृजलाल शर्मा ने कहा कि बटुक ब्रह्माजी की प्रथम संतान माने जाते हैं और गुरुकुलम् के प्रथम दिवस पर बटुकों की उल्लेखनीय उपस्थिति एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल विद्यार्थियों को उनके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराएगा। संस्थापना के सभी कार्यक्रम दण्डी स्वामी जोगेंद्राश्रम महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुए। इस अवसर पर दण्डी स्वामी शिवेन्द्राश्रमजी महाराज ने गुरुकुलम् को एक वृक्ष के रूप में विकसित करने की बात कहते हुए श्रद्धालुओं से इसके संरक्षण व संवर्धन में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में दण्डी स्वामी गजेन्द्राश्रम (हिसार), अवधेशाश्रम (सूरतगढ़), आचार्य जीवन किशोर सामवेदी एवं ज्योतिषाचार्य पं. खींवराज शर्मा मंचासीन रहे। उपस्थित संतों का भावभीना सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चेतन स्वामी द्वारा किया गया।

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