हनुमान ने जलाई सोने की लंका, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मैदान

विपुल पारीक
खेतड़ी नगर (नवयत्न)। केसीसी के रामलीला मैदान में सनातन धर्म समिति की ओर से आयोजित दस दिवसीय रामलीला महोत्सव के छठे दिन शुक्रवार को राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। हनुमानजी के लंका दहन के दृश्य को देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। लीला में बाली वध के बाद सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज बनाया गया। इसके बाद सुग्रीव ने वानर सेना के साथ माता सीता की खोज शुरू की। हनुमानजी समुद्र पार कर लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। शुरुआत में माता सीता हनुमानजी को देखकर डर गईं, लेकिन भगवान श्रीराम की अंगूठी देखकर उन्हें विश्वास हो गया कि वे प्रभु राम के दूत हैं। माता सीता ने हनुमानजी को अपनी व्यथा बताई और जल्द श्रीराम के पहुंचने का संदेश देने को कहा। माता सीता से मिलने के बाद हनुमानजी अशोक वाटिका को उजाड़ने लगे। इस पर राक्षसों ने उन्हें पकड़कर रावण के सामने पेश किया। रावण के आदेश पर हनुमानजी की पूंछ में आग लगा दी गई। इसके बाद हनुमानजी ने जलती पूंछ से सोने की लंका में आग लगा दी। लंका दहन का दृश्य देखकर रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस प्रसंग में हनुमानजी ने रावण के अभिमान को चुनौती दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय सिंह शेखावत थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में हरपाल यादव, धर्मपाल कुमावत, बिशनाराम झाझड़िया और दीक्षा बंबोरिया मौजूद रहे। अध्यक्षता समिति अध्यक्ष सवाई सिंह सिराधना ने की। रामलीला समिति की ओर से भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। राम की भूमिका संजय जिंदड़, सीता की राजेश नारवाल, लक्ष्मण की गिरजा शंकर, हनुमान की सवाई सिंह और रावण की चुन्नीलाल ने निभाई। विभीषण की भूमिका नेमीचंद, मेघनाथ की तिपेश जांगिड़, सुग्रीव की मनोहरलाल, बाली की सुनील फाइटर और अंगद की हरिश शर्मा ने निभाई। इस दौरान समिति महामंत्री अभिषेक पारीक, उपाध्यक्ष राजेश डांढेल, एनके कौशिक, अम्मीलाल जांगिड़ सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विमल शर्मा ने किया।

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