अन्याय या अक्षमता ? आयुष भर्ती पर उठे सवाल
सपना शर्मा
जयपुर/ झुंझुनू (नवयत्न) । राजस्थान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयुष चिकित्सा अधिकारी भर्ती प्रक्रिया इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। परीक्षा पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न होने के बावजूद, कुछ असफल अभ्यर्थियों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप लग रहे हैं, जिससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होने की आशंका है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 17 जुलाई 2025 को लघु विज्ञापन जारी कर संयुक्त भर्ती परीक्षा की घोषणा की थी। इस परीक्षा का उद्देश्य विभिन्न आयुष वर्गों के बीच से सर्वाधिक योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना था। परीक्षा पैटर्न में 40% प्रश्न सामान्य ज्ञान और 60% प्रश्न संबंधित विषयों से पूछे गए।
परीक्षा 26 दिसंबर 2025 को शांतिपूर्ण और बिना किसी विवाद के संपन्न हुई। उस समय तक किसी भी वर्ग की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी। उल्टा, विभिन्न चिकित्सक संगठनों ने सभी 1535 पदों को मेरिट के आधार पर भरने की मांग की थी।
लेकिन 10 अप्रैल 2026 को परिणाम घोषित होते ही स्थिति बदल गई। कुछ असफल होम्योपैथी और यूनानी अभ्यर्थियों के समूह ने परीक्षा के कठिन होने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि इस दावे पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले डॉ. हेमंत कुमार शर्मा स्वयं होम्योपैथी वर्ग से हैं।
मामला कोर्ट में प्रक्रिया अधीन
21 अप्रैल 2026 को नॉर्मलाइजेशन को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई, जिसके बाद 24 अप्रैल को न्यायालय ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को अपने आदेश के अधीन कर लिया। हालांकि अभी तक किसी प्रकार का स्थगन आदेश जारी नहीं किया गया है।
यूं चली भर्ती प्रक्रिया
17 जुलाई 2025 – लघु विज्ञापन जारी
23 सितंबर 2025 – मेरिट से चयन की अनुशंसा
10 अक्टूबर 2025 – विस्तृत विज्ञापन
26 दिसंबर 2025 – परीक्षा संपन्न
10 अप्रैल 2026 – परिणाम घोषित
21 अप्रैल 2026 – याचिका दायर
24 अप्रैल 2026 – प्रक्रिया कोर्ट के अधीन
क्या कहते हैं अभ्यर्थी
1 प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले डॉ. हेमंत कुमार शर्मा के अनुसार तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों का स्तर समान था। जो विद्यार्थी गंभीर तैयारी करके आए थे, उनके लिए परीक्षा कठिन नहीं थी।
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2 एक आयुर्वेद चिकित्सक ने भी बताया कि आयुर्वेद विद्यार्थी शुरुआत से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, जिससे उनका प्रदर्शन बेहतर रहता है।निरन्तर अभ्यास सफलता की कुंजी है।
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3 एक चयनित अभ्यर्थी ने कहा जब चयन हो गया अब शीघ्रता से दस्तावेज सत्यापन की कार्यवाही को पूरा कर नियुक्ति दी जानी चाहिए।परीक्षा परिणाम के बाद विरोध का कोई औचित्य नहीं होता।
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पड़ताल में सामने आए तथ्य
जांच में यह भी सामने आया कि NTA द्वारा आयोजित AIAPGET परीक्षा में आयुर्वेद अभ्यर्थियों की संख्या होम्योपैथी से तीन गुना और यूनानी से नौ गुना अधिक थी, जिससे प्रतिस्पर्धा स्तर में अंतर स्वाभाविक माना जा रहा है।
साथ ही, बोर्ड द्वारा विभिन्न विषयों में हटाए गए प्रश्नों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए स्केलिंग पद्धति अपनाई गई थी, ताकि किसी एक वर्ग को अनुचित लाभ न मिले।
नियम क्या कहते हैं?
सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते और परीक्षा में शामिल होना, विज्ञापन की शर्तों को स्वीकार करना माना जाता है।
बड़े सवाल
जब न्यायालय ने स्टे नहीं दिया, तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन क्यों शुरू नहीं हुआ?
राज्य में खाली पड़े आयुष चिकित्साधिकारी पदों पर नियुक्ति कब होगी?
वर्तमान स्थिति
चयनित अभ्यर्थी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जल्द शुरू कराने की मांग कर रहे हैं
कुछ असफल अभ्यर्थी कोर्ट में मामला होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं
चयनित अभ्यर्थियों ने न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की मांग भी की है।
मेरिट बनाम नॉर्मलाइजेशन
यह पूरा विवाद अब “मेरिट बनाम नॉर्मलाइजेशन” की लड़ाई बन चुका है। एक ओर योग्य अभ्यर्थी अपने चयन को सुरक्षित रखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर विरोध कर रहे अभ्यर्थी नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इस बीच, राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका बढ़ती जा रही है।