अभिभाषक संघ पर फिजूलखर्ची के लगे आरोप, वकीलों ने की नारेबाजी

अमित प्रजापत
सुजानगढ़ (नवयत्न) । अभिभाषक संघ के कुछ सदस्य वकीलों ने अभिभाषक संघ सुजानगढ़ बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया है और फिजूलखर्ची के आरोप लगाते हुए अभिभाषक संघ के अध्यक्ष के खिलाफ दिनभर धरना भी दिया। धरने पर अभिभाषक संघ द्वारा सामूहिक भोज आयोजित करने के प्रस्ताव को फिजूलखर्ची बताया गया और इसको लेकर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भोजन के कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की गई। पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री खाने का तेल, रसोई गैस और पेट्रोल डीजल बचाने की अपील जनता से कर रहे हैं। वहीं अभिभाषक संघ द्वारा सामूहिक भोज का आयोजन करना फिजूलखर्ची है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। एडवोकेट करणीदान चारण ने कहा कि जब स्थापना दिवस बार संघ का आता है, तब वकीलों के अनुरोध के बावजूद भी सामूहिक भोजन आयोजित करने की बात पर फंड की कमी का हवाला दिया जाता है। जबकि बात विदाई और पार्टी की हो तो, सामूहिक भोजन किया जा रहा है, जिसकी हम लोग खिलाफत करते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभाषक संघ की फिजूलखर्ची के खिलाफ धरना जारी रहेगा। वहीं धरने पर वकीलों ने नारेबाजी की। धरनार्थियों से वार्ता करने के लिए वकीलों की मीटिंग भी आयोजित की गई, जिसमें कोई आम सहमति धरनार्थियों और अभिभाषक संघ के अध्यक्ष के बीच तैयार नहीं हो सकी, जिसके कारण कुछ वकील फिर से धरने पर बैठ गए। धरने पर अभिभाषक संघ के उपाध्यक्ष प्रदीप कठातला, रजाक खान, दशरथसिंह राठौड़, अक्षय शर्मा, विमल दाधीच, बाबूलाल कीलका, नरेश सिंवर, रजमान मणिहार, हनुमान मल प्रजापत, राजेंद्र सोनी सहित अनेक वकील बैठे और फिजूलखर्ची के खिलाफ नारेबाजी की।
दूसरी ओर इस बारे में अभिभाषक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट सूरजमल यादव से बात करने पर उन्होंने बताया कि संघ में प्रस्ताव लेकर ही भोजन रखा गया है, अब कुछ लोग अगर व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए विरोध कर रहे हैं, तो हम लोग बाकी के 98 प्रतिशत वकीलों की सहमति और इच्छा का अनादर नहीं कर सकते। सूरजमल यादव ने कहा कि वार्ता में सब प्रकार से धरनार्थियों को मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन अगर किसी को जिद ही करनी है, तो कोई समाधान नहीं निकल सकता। सभी सीनियर वकीलों और अभिभाषक संघ की सहमति से ही भोजन का आयोजन किया गया है। वहीं अभिभाषक संघ के सचिव एडवोकेट बनवारीलाल बिजारणिया ने कहा कि फिजूलखर्ची के सारे आरोप निराधार हैं। क्योंकि अभिभाषक संघ में फंड की कोई कमी नहीं है, अधिकारियों के सम्मान में ऐसे आयोजन होते रहे हैं और इससे बार की गरिमा भी बनी रहती है। जहां तक स्थापना दिवस पर भोजन की बात है, तो ऐसी परम्परा नहीं रही है, वरना आयोजन तो हो सकता है। अगर अभिभाषक संघ में ऐसा प्रस्ताव लिया जायेगा, तो भविष्य में स्थापना दिवस पर भी ऐसे आयोजन हो सकते हैं।

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