नवलगढ़ ने फिर दिखाया प्यार! डॉ. राजकुमार शर्मा की वापसी के पीछे क्या है कहानी?
सुरेंद्र शर्मा
नवलगढ़ (नवयत्न)। राजनीति में चुनावी हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी नेता की असली राजनीतिक सक्रियता चुनाव के बाद भी जनता के बीच उसकी मौजूदगी से दिखाई देती है। नवलगढ़ में पूर्व विधायक एवं पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा को लेकर इन दिनों फिर राजनीतिक चर्चा तेज है।

डॉ. राजकुमार शर्मा नवलगढ़ से तीन बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा
2023 के बाद भी जनता से संपर्क कायम
2023 की हार के बाद भी डॉ. राजकुमार शर्मा और उनकी टीम की नवलगढ़ में सक्रियता बनी रही। समर्थकों का कहना है कि पद नहीं होने के बावजूद सुख-दुख में लोगों के बीच पहुंचना, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना और आम लोगों की समस्याएं सुनना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा।
समर्थकों के अनुसार, “वोट मन का होता है, जो दिल में जचेगा उसे वोट मिलेगा।” इसी सोच के साथ उन्होंने जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए अपना जनसंपर्क जारी रखा।

तीन साल में नाराजगी और बदलाव की चर्चा
डॉ. राजकुमार शर्मा के समर्थकों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में बिजली, पानी और स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ा। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले बदलाव को लेकर जनता में जो उम्मीद बनी थी, वह कई मामलों में पूरी नहीं हो सकी।
समर्थकों के अनुसार, वर्तमान जनप्रतिनिधि द्वारा किए गए कई वादे और घोषणाएं धरातल पर अपेक्षित रूप से नहीं पहुंचीं। उनका कहना है कि “परिवर्तन” जनता के लिए जिस सुखद उम्मीद का नाम था, वह कई लोगों के लिए निराशा का कारण बन गया। जब घोषणाएं जमीन पर दिखाई नहीं देतीं तो लोगों के धैर्य का बांध टूटना स्वाभाविक है।
हालांकि ये राजनीतिक आकलन और समर्थकों की राय हैं; स्थानीय समस्याओं और घोषणाओं के क्रियान्वयन का स्वतंत्र मूल्यांकन अलग-अलग मुद्दों के आधार पर किया जाना होगा।

निकाय चुनाव ने बढ़ाई चर्चा
2026 के निकाय चुनाव के बाद डॉ. राजकुमार शर्मा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा और तेज हुई है। नवलगढ़ और मुकुंदगढ़ में कांग्रेस के बोर्ड बनने के बाद उनके समर्थक इसे उनके लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता से जोड़कर देख रहे हैं।
समर्थकों का कहना है कि नगरपालिका चुनाव में जिस तरह डॉ. राजकुमार शर्मा को लोगों का समर्थन मिला, वह आगे भी बढ़ेगा, कम नहीं होगा। उनका तर्क है कि चुनाव के बाद भी डॉ. शर्मा की टीम उसी लगन से लोगों के काम में लगी रही और दोनों भाइयों का ध्यान राजनीतिक पद से ज्यादा जनता के काम पर रहा।
राजकुमार शर्मा–राजपाल शर्मा की जोड़ी
डॉ. राजकुमार शर्मा के साथ उनके छोटे भाई डॉ. राजपाल शर्मा की सक्रियता भी लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनी भाई दो जिस्म एक जान कहे जाते है समर्थकों के अनुसार, किसी जरूरतमंद की मदद हो, सामाजिक कार्यक्रम हो या स्वास्थ्य संबंधी सहायता—दोनों भाई अपनी टीम के साथ लोगों के बीच मौजूद रहते हैं।
रक्तदान और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में अगर पुरे राजस्थान में सबसे आगे नाम अत है तो डॉ राजकुमार शर्मा और उनकी टीम का आता है। हर स्वास्थ्य सम्बन्धी मामलों में किसी की भी सेवा से पीछे नहीं हटते है
कुर्सी बदली, संपर्क नहीं
डॉ. राजकुमार शर्मा के समर्थकों के लिए 2023 के बाद की कहानी केवल चुनावी हार की नहीं, बल्कि लगातार जनता के बीच बने रहने की है। उनका कहना है कि राजनीतिक कुर्सी बदली, लेकिन जनता से रिश्ता नहीं बदला।
नवलगढ़ की राजनीति में आगे क्या होगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि 2026 के निकाय चुनाव के बाद डॉ. राजकुमार शर्मा की सक्रियता और उनके समर्थक नेटवर्क को लेकर स्थानीय राजनीतिक चर्चा फिर तेज हुई है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नगरपालिका चुनाव के परिणामों का असर आने वाले पंचायत चुनावों पर भी पड़ सकता है। तीन साल बाद भी बिजली, पानी और अन्य समस्याओं के समाधान तथा किए गए वादों के धरातल पर नहीं उतरने को लेकर पूरे नवलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में नाराजगी की चर्चा है। विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे माहौल में डॉ. राजकुमार शर्मा की लगातार सक्रियता और जनता से जुड़ाव उनका जनाधार और मजबूत कर सकता है।