काॅपर प्रोजेक्ट के स्मेलटर चिमनी के अस्तित्व बचाने को जुटे लोग, सांसद ओला को ज्ञापन देकर की धरोहर घोषित करने की मांग

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खेतड़ी (नवयत्न) । काॅपर प्रोजेक्ट के स्मेलटर चिमनी का अस्तित्व बचाने को लेकर आमजन एकजुट होने लगे हैं। ग्रामीणों ने झुंझुनूं सांसद बिजेंद्र सिंह ओला को ज्ञापन देकर धरोहर घोषित करने की मांग की है। ग्रामीणों की ओर से दिए ज्ञापन में बताया कि
राजस्थान के तांबा नगर के नाम से विख्यात खेतड़ी की पहचान अब खतरे में है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ऐतिहासिक 114 मीटर ऊंची स्मेल्टर चिमनी को ढहाने के प्रस्ताव के खिलाफ समूचा क्षेत्र लामबंद हो गया है। ‘चिमनी बचाओ अभियान’ के तहत उसे धरोहर घोषित करने की मांग की जा रही है।
वर्ष 1967 में जब देश तांबा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहा था, तब खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की नींव रखी गई थी। 1970 के दशक में बनी यह विशालकाय चिमनी दशकों तक क्षेत्र की आर्थिक उन्नति का केंद्र रही। अब कॉम्प्लेक्स की कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं और टाउनशिप वीरानी की ओर है, तब यह चिमनी यहाँ के गौरवशाली इतिहास की आखिरी गवाह बनकर खड़ी है। खेतड़ी प्रधान मनीषा गुर्जर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सांसद ओला को ज्ञापन सौंपकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। प्रधान ने कहा कि यह केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामूहिक स्मृतियों का हिस्सा है। इसे तोड़ना इतिहास को मिटाने जैसा होगा। क्षेत्र की जनभावनाओं को देखते हुए झुंझुनूं सांसद बृजेन्द्र ओला ने जल्द केंद्रीय खान मंत्री को पत्र लिखकर इस चिमनी को ढहाने पर रोक लगाने और इसे औद्योगिक धरोहर घोषित करवाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर चिमनी बचाओ अभियान के संयोजक रमेश पांडे, नगर कांग्रेस कमेटी सिंघाना अध्यक्ष डी पी सैनी, एससी प्रकोष्ठ बुहाना अध्यक्ष बाबूलाल कालोडिया, प्रभारी चुनीलाल चनेजा, सरपंच शंकर बिलवा, रणजीत, राजू, विक्रम, विजय सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

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