बच्चों को पढ़ा लिखा कर प्राउड मॉम बनी रेणु कक्कड़
संजय सोनी
झुंझुनू (नवयत्न) । समाज सेवी रेणु कक्कड़ एक ख़ुशनसीब व गर्व से अभिभूत मां है, क्योंकि आज उनकी मेहनत सफल हो गई है।किसी समय वह सोचती थी कि पढीलिखी होकर भी घरेलू जीवन जीती रही कुछ कर नहीं सकी, लेकिन फिर उन्होंने अपना पूरा ध्यान बच्चों की अच्छी परवरिश अच्छी शिक्षा की ओर लगा दिया। सोचा ज़रूरी नहीं कि पढलिख कर पैसे कमाना ही आवश्यक है सहयोग कैसे भी हो सकता है बच्चों को अच्छे संस्कार अच्छी शिक्षा देना भी अहम कर्तव्य है।इन्होंने 15 साल तक जयपुर के बाज़ार मॉल तक नहीं देखे, रास्ते तक से भी अनजान थी कि किटटी क्लब क्या होता है नहीं पता था। बस बच्चों के साथ उनकी प्रदर्शनी उनके प्रोग्राम उनकी पसंद की मूवी देखना ही हॉबी बन चुकी थी। बकौल रेणु ने बताया कि मैं ही उनकी माँ व बेस्ट फ्रेंड थीं।पैसा कम ज़्यादा कभी मायने नहीं रखा। ख़ुशियों में ही सदा मेरा घर संसार रहा।ईश्वर की अथाह कृपा व बच्चों की मेहनत माता-पिता के अच्छे संस्कार से आज मेरे बेटे-बेटी व बेटी से बढ़कर बहू की मैं प्राउड मॉम हूँ।मेरे बच्चे अच्छे डॉक्टर बनकर अपनी सेवाएँ देकर अपनी मां का व इस परिवार का पूरे समाज का नाम रौशन कर रहे हैं।