गंभीर रूप से अस्वस्थ प्रभुजी को अपना घर आश्रम में मिला सहारा

नवरतन वर्मा
रतनगढ़ (नवयत्न) । रतनगढ़ में निराश्रित , विमंदित और अस्वस्थ व्यक्तियों की प्रभुजी के रूप में सेवार्थ संचालित अपना घर आश्रम में क्षय रोग से पीड़ित गंभीर अस्वस्थ प्रभुजी का आगमन हुआ । जिसका कोई नहीं होता है उसकी संभाल की व्यवस्था ठाकुर जी महाराज स्वयं करते हैं , यह स्पष्ट रूप से उस समय चरितार्थ हुआ जब सुजानगढ़ रेलवे स्टेशन के पास लगभग निर्वस्त्र पड़े असहाय व्यक्ति को किसी राहगीर ने देखा और 108 पर सूचना कर दी तो राजकीय बगड़िया चिकित्सालय में उसे पहुंचा दिया गया। वहां चिकित्सालय में उसका उपचार प्रारंभ हुआ और जानकारी मिलते ही इस प्रकार की सेवा के लिए सहज सुलभ श्याम स्वर्णकार उनकी देखरेख के लिए पहुंच गए । तीन दिन तक हॉस्पिटल में उपचार के बाद उन्होंने अपना घर आश्रम के सचिव कुलदीप व्यास से संपर्क किया और आश्रम अध्यक्ष डॉ वी पी गोयल की स्वीकृति के पश्चात् श्याम स्वर्णकार ने सुजानगढ़ पुलिस को सूचित कर उसे एंबुलेंस से पहुंचाया । आश्रम पहुंचने पर हेमंत प्रजापत की देखरेख में आश्रम की परंपरानुसार नये प्रभुजी का मुंडन , अभिषेक कर नवीन वस्त्र पहनाए गए और आवश्यक चिकित्सा प्रारंभ की गई । अत्यन्त दयनीय स्थिति में दिखाई देने वाले इस व्यक्ति को सुजानगढ़ से लेकर आने वाले श्याम स्वर्णकार और विनोद सेन ने बताया कि जैसी टूटी फूटी भाषा में यह व्यक्ति थोड़ा बहुत बता पाया है उसके अनुसार यह दक्षिण भारतीय है और परिवार से उपेक्षित है। आश्रम संचालन समिति के कोषाध्यक्ष नरेंद्र झंवर , प्रताप बोथरा , महावीर रामगढ़िया आदि ने प्रभुजी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसी समय भरतपुर मुख्यालय से संपर्क किया तो वहां से मिले निर्देशों के अनुसार स्थानीय क्षय रोग केंद्र में जांच उपरांत उसके समुचित ईलाज हेतु एंबुलेंस में आश्रम के सेवा – साथी अंकित और सुरेश के साथ भरतपुर मुख्यालय के लिए रवाना किया गया। इस पुनीत कार्य में निस्वार्थ भाव से सहयोग करने वाले श्याम स्वर्णकार और विनोद सेन का आश्रम ट्रस्ट द्वारा दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।

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