सूर्पणखा की नाक काटने के बाद हुआ सीता हरण, रामलीला में भावुक हुए दर्शक
हर्ष सोनी
झुंझुनूं (नवयत्न)। गांधी चौक में श्रीरामलीला परिषद की ओर से आयोजित 70वीं रामलीला में शनिवार को सूर्पणखा की नाक काटने, खर-दूषण वध और सीता हरण की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया। लीला के दौरान दर्शकों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए और मंचन का आनंद लिया। रामलीला के प्रसंग के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वन में निवास कर रहे थे। इसी दौरान रावण की बहन सूर्पणखा वहां पहुंची। सूर्पणखा ने भगवान श्रीराम को देखकर उनसे विवाह करने की इच्छा जताई। जब उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई तो वह लक्ष्मण के पास पहुंची। घटनाक्रम के दौरान लक्ष्मण ने सूर्पणखा की नाक काट दी। अपमानित सूर्पणखा क्रोधित होकर अपने संबंधियों खर, दूषण और त्रिशिरा के पास पहुंची तथा उन्हें पूरी घटना बताई। इसके बाद खर-दूषण और उनकी सेना ने भगवान श्रीराम से युद्ध किया। भगवान श्रीराम ने युद्ध में खर, दूषण और त्रिशिरा का वध कर दिया। अपने संबंधियों के मारे जाने और स्वयं के अपमान से आहत सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास पहुंची। उसने रावण को पूरी घटना बताई और उसे बदला लेने के लिए उकसाया। बहन के अपमान और अपने संबंधियों के वध से क्रोधित रावण ने सीता का हरण करने की योजना बनाई। इस योजना को पूरा करने के लिए उसने अपने मामा मारीच की सहायता ली। मारीच ने मायावी स्वर्ण मृग का रूप धारण किया। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने भगवान श्रीराम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह किया। सीता की इच्छा पूरी करने के लिए श्रीराम मृग के पीछे चले गए। इसके बाद घटनाक्रम में लक्ष्मण भी कुटिया से दूर चले गए और रावण ने अवसर पाकर साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण कर लिया। सीता हरण के बाद भगवान श्रीराम जब कुटिया लौटे तो माता सीता को वहां नहीं पाकर व्याकुल हो उठे। उन्होंने लक्ष्मण के साथ मिलकर सीता की तलाश शुरू की। इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को रामायण की कथा के महत्वपूर्ण मोड़ से रूबरू कराया। राम-लक्ष्मण के सीता की खोज में निकलने के साथ लीला का यह प्रसंग संपन्न हुआ। रामलीला में प्रमोद खंडेलिया, दिनेश शर्मा, अशोक केडिया, संयोजक संजय सैनी, संपत पुरोहित, एडवोकेट अनुपम शर्मा, आनंद टीबड़ा, श्याम सुंदर टीबड़ा, अशोक शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।