अस्थमा मरीजों की संख्या में उछाल : विशेषज्ञों ने दिए बचाव के उपाय
डी. के. सैनी
जयपुर (नवयत्न) । अस्थमा अब केवल सांस लेने की अस्थायी समस्या नहीं रह गया है,बल्कि यह भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में तेजी से उभर रहा है। जो लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। बढ़ते वायु प्रदूषण, पर्यावरणीय कारणों और जीवनशैली में बदलाव के चलते अस्थमा के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में अस्थमा के मरीजों की संख्या लगभग 3 से 4 करोड़ के बीच अनुमानित है, जो वैश्विक अस्थमा रोग भार का एक बड़ा हिस्सा है। हालांकि, बड़ी संख्या में मामले समय पर पहचान में नहीं आ पाते, जिसके कारण मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं।
यह जानकारी फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अंकित बंसल तथा पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. विनोद शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि अस्थमा लाइलाज है, लेकिन सही उपचार, जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव के जरिए इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉक्टरों ने बताया कि अस्थमा के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें प्रमुख रूप से वायु प्रदूषण और वाहन धुएं का संपर्क, धूल एवं परागकण, घरेलू एलर्जन जैसे डस्ट माइट्स और पालतू पशुओं के रोएं, धूम्रपान तथा पैसिव स्मोकिंग, परिवार में अस्थमा का इतिहास, बचपन में फेफड़ों के संक्रमण तथा रसायनों के संपर्क वाले कार्यस्थल शामिल हैं।
अस्थमा के लक्षण व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं और रात के समय या शारीरिक गतिविधि के दौरान बढ़ सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, लगातार खांसी (विशेषकर रात या सुबह के समय) तथा सीने में जकड़न शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर इन लक्षणों को सामान्य एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे इलाज में देरी होती है।
अस्थमा का निदान मरीज के इतिहास और लक्षणों के विस्तृत मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने के लिए स्पाइरोमेट्री टेस्ट प्रमुख है, जबकि कुछ मामलों में पीक फ्लो टेस्ट और एलर्जी परीक्षण भी किए जाते हैं, ताकि रोग के ट्रिगर्स की पहचान हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार अस्थमा की पूरी तरह रोकथाम संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए प्रदूषण से बचाव, मास्क का उपयोग, घर की साफ-सफाई, धूम्रपान से दूरी, ट्रिगर्स की पहचान, डॉक्टर द्वारा निर्धारित इनहेलर का नियमित उपयोग तथा घर में उचित वेंटिलेशन बनाए रखना आवश्यक है।
डॉक्टरों ने कहा कि अस्थमा को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, लेकिन समय पर उपचार और नियमित देखभाल से मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है।