चेक बाउंस के दो अलग-अलग मामलों में आरोपी को एक-एक साल की सजा

सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न) । अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय नोहर की पीठासीन अधिकारी रामकन्या सोनी (आर.जे.एस.) ने चेक बाउंस के दो अलग-अलग मामलों में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों मामलों में आरोपी को एक-एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही कुल ₹16,30,000/- (सोलह लाख तीस हजार रुपये) का आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया है।
मामले की जानकारी देते हुए शाखा प्रबंधक प्रवीण सिंह व नरोत्तम कुमार ने बताया कि सीकर रीजन की श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड शाखा तारानगर की ओर से एक ही कर्जदार के खिलाफ ऋण (लोन) चुकता न करने पर दो अलग-अलग चेक बाउंस के मुकदमे दर्ज कराए गए थे। न्यायालय में इन मामलों की प्रभावी पैरवी कंपनी के विद्वान अधिवक्ता राजेराम जांगिड़ व कंपनी के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर एडवोकेट मांगेराम नैण द्वारा की गई। माननीय न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी प्रेम सिंह पुत्र सुरजन सिंह (उम्र 55 वर्ष), निवासी- वार्ड नंबर 8, तारानगर, जिला चूरू को परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के अंतर्गत दोषी पाया।
अदालत द्वारा दोनों मामलों में सुनाया गया विस्तृत फैसला:
1. पहला मामला (वाहन संख्या: RJ 10 G 1510) :
वाहन ऋण की बकाया राशि की अदायगी के लिए आरोपी ने ₹7,00,000/- (सात लाख रुपये) का चेक जारी किया था, जो बैंक में पर्याप्त राशि न होने के कारण अनादृत (बाउंस) हो गया। इस मामले में अदालत ने दोषी प्रेम सिंह को 01 वर्ष के साधारण कारावास की सजा और ₹7,00,000/- के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को 03 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
2. दूसरा मामला (वाहन संख्या: RJ 10 GA 6415) :
वाहन ऋण के तहत आरोपी द्वारा जारी किया गया ₹9,30,000/- (नौ लाख तीस हजार रुपये) का दूसरा चेक भी बैंक में अनादृत हो गया था। इस प्रकरण में भी न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को 01 वर्ष के साधारण कारावास और ₹9,30,000/- के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसमें भी जुर्माना अदा न करने पर 03 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वर्तमान वाणिज्यिक युग में चेक के माध्यम से होने वाले लेन-देन की प्रतिष्ठा और अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाना आवश्यक है।

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