गुमनाम रहकर सीएसईएएम फैलाने वालों की खैर नहीं : एडीजी वीके सिंह

निसं
जयपुर (नवयत्न)। बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री सीएसईएएम के प्रसार के खिलाफ राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम ब्रांच ने बड़ा अभियान शुरू किया है। मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए ऐसी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करने वालों पर पुलिस लगातार निगरानी रख रही है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चल रही कार्रवाई के तहत प्रदेश में अब तक करीब 7 हजार 800 यूआरए/ मीडिया प्रोफाइल, 15 हजार 326 मोबाइल नंबर और 100 डिवाइस चिन्हित कर ब्लॉक करवाए गए हैं। एनसीएमईसी की टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों में प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण और एनसीएमईसी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल ट्रेल की पहचान की जा रही है। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को जानकारी देकर आपत्तिजनक लिंक, प्रोफाइल और मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए जा रहे हैं। टेलीग्राम-डिस्कॉर्ड के गुप्त ग्रुप बने माध्यम पुलिस के अनुसार सीएसईएएम के प्रसार के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त या पेड ग्रुप और चैनल बनाए जाते हैं। इनमें लोग फर्जी अथवा गुमनाम पहचान के साथ जुड़कर आपत्तिजनक सामग्री का आदान-प्रदान करते हैं। कई मामलों में सामग्री निजी संदेशों के जरिए भेजी जाती है, जबकि गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टोरेज पर सामग्री अपलोड कर केवल उसका लिंक साझा किया जाता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी कार्रवाई से बचने के लिए सोशल मीडिया पर कोडेड शब्दों और हैशटैग का इस्तेमाल भी करते हैं। कई बार इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसे सामान्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संपर्क शुरू करने के बाद बातचीत को अपेक्षाकृत कम निगरानी वाले प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है।
रिपीट ऑफेंडर्स पर विशेष नजर
एनसीएमईसी टिपलाइन से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर बार-बार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को चिन्हित किया जा रहा है। इनके खिलाफ संबंधित थानों में प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर ऐसे ग्रुप और नेटवर्क की निगरानी कर रही है। दूसरे राज्यों से जुड़े संदिग्धों की जानकारी संबंधित पुलिस एजेंसियों को उपलब्ध कराई जा रही है।
गुमनाम पहचान के पीछे छिपना आसान नहीं
एडीजी वीके सिंह ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर फर्जी या गुमनाम पहचान बनाकर ऐसी गतिविधियों में शामिल होने वाले भी पुलिस की नजर से नहीं बच सकते। तकनीकी माध्यमों से डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री देखना, डाउनलोड करना, रखना या साझा करना पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है।
अभिभावक बच्चों के ऑनलाइन इस्तेमाल पर रखें नजर
राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नजर रखने तथा उन्हें असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति जागरूक करने की अपील की है। पुलिस ने संदिग्ध लिंक, ग्रुप, चैनल अथवा ऐसी सामग्री सामने आने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की सलाह दी है। इस संबंध में एसपी सुमित मेहरड़ा ने भी जानकारी साझा की।

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