चेयरमैन पद को लेकर भाजपा में घमासान, वार्ड 5 बना चुनावी चर्चा का केंद्र
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सूरजगढ़ (नवयत्न)। नगरपालिका चुनाव में चेयरमैन पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा के भीतर चेयरमैन पद की दावेदारी को लेकर चल रही खींचतान का असर अब वार्ड स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। खास तौर पर वार्ड 5 इन दिनों चुनावी चर्चाओं का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस वार्ड में निवर्तमान चेयरमैन पुष्पा देवी गुप्ता और पिछले चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीत दर्ज करने वाली पूर्व पार्षद गिन्नी देवी गोयल के आमने-सामने आने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
वार्ड बदलने से बदले राजनीतिक समीकरण
निवर्तमान चेयरमैन पुष्पा देवी गुप्ता पिछले पांच वर्षों तक नगरपालिका की चेयरमैन रहीं। इस बार उनके पूर्व वार्ड 6 की सीट ओबीसी होने के बाद उन्होंने वार्ड 5 से पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। उनके वार्ड बदलकर चुनाव मैदान में उतरने के फैसले को लेकर कस्बे की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चेयरमैन पद की दौड़ में बने रहने के लिए पार्षद का चुनाव जीतना महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में पुष्पा देवी गुप्ता का वार्ड 5 से चुनाव लड़ना अपने आप में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
पूर्व पार्षद गिन्नी देवी गोयल ने भी ठोकी ताल
वहीं, वार्ड 5 से पिछला चुनाव सबसे अधिक मतों से जीतने वाली पूर्व पार्षद गिन्नी देवी गोयल भी इस बार मैदान में हैं। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर भाजपा के लिए वार्ड 5 में चुनौती खड़ी कर दी है।
गिन्नी देवी गोयल की पिछले चुनाव में बड़ी जीत और वार्ड में उनकी सक्रियता को देखते हुए उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने से मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। उनके समर्थकों का मानना है कि पिछले कार्यकाल के दौरान वार्ड में विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं को लेकर उनकी सक्रिय भूमिका का लाभ उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है।
एक ही वार्ड में दो प्रमुख चेहरे
वार्ड 5 में अब मुकाबला केवल पार्षद पद तक सीमित नजर नहीं आ रहा। एक तरफ पांच साल तक नगरपालिका की कमान संभाल चुकीं पुष्पा देवी गुप्ता हैं, तो दूसरी तरफ पिछले चुनाव की मजबूत विजेता और पूर्व पार्षद गिन्नी देवी गोयल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
इसी वजह से वार्ड 5 का चुनाव पूरे सूरजगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। वार्डवासियों के बीच दोनों प्रत्याशियों की राजनीतिक पकड़, व्यक्तिगत जनसंपर्क और पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या चेयरमैन की कुर्सी का रास्ता वार्ड 5 से निकलेगा?
नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं, लेकिन फिलहाल राजनीतिक रूप से सबसे अधिक नजरें वार्ड 5 पर टिकी हुई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां का परिणाम चेयरमैन पद की आगे की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
पुष्पा देवी गुप्ता यदि वार्ड 5 से चुनाव जीतती हैं तो चेयरमैन पद की दावेदारी में उनकी स्थिति मजबूत मानी जा सकती है। वहीं, गिन्नी देवी गोयल की जीत यह संकेत दे सकती है कि वार्ड में उनका व्यक्तिगत जनाधार अभी भी मजबूत है और पार्टी के टिकट से बाहर होने के बावजूद वे चुनावी मुकाबले में प्रभावी चुनौती पेश कर सकती हैं।
वार्डवासियों के रुख पर टिकी निगाहें
चुनावी मैदान सजने के साथ ही दोनों प्रत्याशियों ने अपने-अपने स्तर पर जनसंपर्क तेज कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्ड 5 के मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
क्या पांच साल तक चेयरमैन रहीं पुष्पा देवी गुप्ता वार्ड बदलकर भी अपनी राजनीतिक पकड़ साबित कर पाएंगी? या फिर पिछली बार सबसे अधिक मतों से जीतने वाली गिन्नी देवी गोयल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना दबदबा कायम रखेंगी?
इन सवालों के जवाब चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन इतना तय है कि नगरपालिका के 25 वार्डों में वार्ड 5 का चुनाव इस बार सबसे ज्यादा चर्चित और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबलों में शामिल हो गया है।