ज्योतिष शोध संगोष्ठी में वैदिक परंपरा और आधुनिक शोध पर हुआ मंथन
अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न) । सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष शोध संगोष्ठी के प्रथम दिवस का समापन शनिवार को हुआ। उद्घाटन सत्र में विद्वानों ने भारतीय ज्योतिष परंपरा के संरक्षण और उसके अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं शोधपत्र वाचन सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों ने वैदिक ज्योतिष के विविध आयामों पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। परिसर में आयोजित निःशुल्क ज्योतिषीय परामर्श शिविर में भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम मुख्य अतिथि पवन भंडारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सारस्वत अतिथि वैद्य रमेश कुमार पारीक ने ज्योतिष और आयुर्वेद के परस्पर संबंधों पर प्रकाश डालते हुए दोनों विधाओं को मानव कल्याण का प्रभावी माध्यम बताया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमंत कृष्ण मिश्र ने “वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव एवं आधुनिक जीवन में उनकी प्रासंगिकता” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए ग्रहों के मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्योतिष केवल भविष्य कथन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न पक्षों को समझने की एक प्राचीन ज्ञान प्रणाली भी है। संगोष्ठी के दौरान आयोजित निःशुल्क ज्योतिषीय परामर्श शिविर में लाडनूं, जसवंतगढ़, सुजानगढ़, बालसमंद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। विशेषज्ञों ने वैदिक ज्योतिष के आधार पर जन्मपत्रियों का अध्ययन कर विभिन्न ज्योतिषीय जिज्ञासाओं का समाधान एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।