पार्षद कहां से आये और कहां गए …?
निसं
झुंझुनूं (नवयत्न)। नगर परिषद झुंझुनूं के सभापति चुनाव के अगले ही दिन उपसभापति के चुनाव में वोटों का गणित पूरी तरह बदला नजर आया। सोमवार को सभापति पद के लिए हुए मतदान में सभी 60 पार्षदों ने मतदान किया था। कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान को 35 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी मनु धनकड़ के पक्ष में 25 पार्षदों ने मतदान किया था।
मंगलवार को उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र डारा ने 44 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा प्रत्याशी बुधराम सैनी को महज 16 वोट मिले। इस तरह डारा ने भाजपा के सैनी को 28 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त दी।
डारा की जीत के बाद कांग्रेस समर्थकों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। लेकिन चुनाव परिणाम के बाद शहर में सबसे ज्यादा चर्चा वोटों के बदले हुए गणित को लेकर रही। आमजन के बीच सवाल उठता रहा कि सोमवार को कांग्रेस के खाते में 35 और भाजपा के खाते में 25 वोट थे, तो महज 24 घंटे बाद कांग्रेस 44 तक कैसे पहुंच गई और भाजपा 16 पर कैसे सिमट गई?
चुनावी चर्चा के बीच कुछ लोगों की टिप्पणी भी सामने आई “कल के व्यापारी अलग थे, रात बीती, बात बीती।” वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी होती रही कि सोमवार को भाजपा के पक्ष में गया वोट मंगलवार को कांग्रेस के पक्ष में कैसे बदल गया। जबकि पार्षद वही 60 फिर भी गणित अलग, हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल इतना जरूर है कि सभापति चुनाव में 35-25 का आंकड़ा और अगले दिन उपसभापति चुनाव में 44-16 का परिणाम नगर परिषद की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है। राजनीतिक हलकों में इसे पार्षदों के बदलते समीकरण और चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।