5 गांवों को सुजानगढ़ पेराफेरी में शामिल करने का मामला
अबूबकर बल्खी
लाडनूं (नवयत्न) । पंचायत समिति लाडनूं के ग्राम आसोटा, खानपुर, भियानी, जसवन्तगढ़ एवं सुजला क्षेत्र को सुजानगढ़ पेराफेरी एरिया में शामिल करने का विरोध अभी शान्त नहीं हो पाया वहीं दूसरी तरफ इन क्षेत्रों में ग्राम पंचायतो द्वारा जारी किए गए पट्टों पर भी अब सवाल खड़ा हो गया हैं। वर्षों से भूमि रूपांतरण एवं नियमन बदलाव की मार झेल रहे ग्रामीणों को राहत मिलने की बजाय पट्टों पर संकट मंडराने लगा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा एक निर्णय लेते हुए लाडनूं तहसील के ग्राम जसवंतगढ़, आसोटा, खानपुर, भियानी, सुजला आदि गांवों को नगर परिषद सुजानगढ़ के पैराफेरी क्षेत्र में शामिल कर लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र को कन्वर्जन और नियमन दायरे में ले लिया गया। इसके बाद जारी किए गए पट्टों को लेकर विधानसभा में सवाल उठने के बाद अब 60 पट्टों की वैधता पर संकट खड़ा हो गया है।
सुजानगढ़ पेराफेरी में शामिल होने के बाद ग्राम पंचायत के पट्टों को बताया नियम विरुद्ध
सुजानगढ़ विधायक मनोज कुमार ने 16 वीं राजस्थान विधानसभा में तारांकित प्रश्न संख्या 05/3383 के माध्यम से सरकार से जवाब मांगा है। प्रश्न में यह पूछा गया है कि सुजानगढ़ पैराफेरी क्षेत्र में आने के बाद ग्राम पंचायतों द्वारा जारी किए गए पट्टे वैध हैं या नहीं तथा प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी। विधानसभा में मामला उठने के बाद राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग तथा जिला परिषद नागौर द्वारा लाडनूं विकास अधिकारी से तत्काल रिपोर्ट तलब की गई है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिन मामलों में नियमन, कन्वर्जन अथवा पट्टा जारी करने की प्रक्रिया नियमानुसार की गई है, वहां आम नागरिकों को राहत देने पर विचार किया जा सकता है। वहीं यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों, ग्रामसेवक और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होना भी तय है।
दोहरी मार झेलने को मजबूर हुए ग्रामीण
लाडनूं क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इन क्षेत्रों को लाडनूं के ग्रामीण क्षेत्र से सुजानगढ़ शहरी क्षेत्र में शामिल करने के बाद भी पिछले लंबे समय से क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, नालियों की नियमित सफाई, सीवरेज व्यवस्था तथा अन्य शहरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। तथा वर्षों से लंबित नियमन और पट्टा संबंधी मामलों का स्थायी समाधान नहीं होने से उन्हें खासा परेशानियां उठानी पड़ रही हैं।
नियमन प्रक्रिया का ग्रामीणों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर परिषद सुजानगढ़ द्वारा आसपास की कॉलोनियों में 500 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से नियमन प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में नियमन की दर 5 रूपये प्रति वर्गमीटर थी परन्तु सुजानगढ़ नगर परिषद् के अंतर्गत आने के पश्चात् यह राशि 100 गुना अधिक तक वसूली जानी हैं जिसका ग्रामीणों के सिर पर आर्थिक बोझ बढ़ने लगा है।
इनका कहना है।
पेराफेरी एरिया के पट्टों को जारी करने के संबंध में कोई स्पष्ट आदेश प्राप्त नहीं है। अगर ऐसा है तो उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर ही आगे कार्य किया जाएगा।
धर्मवीर सिंह (ग्राम विकास अधिकारी)
ग्राम पंचायत जसवंतगढ़, लाडनूं।
क्षेत्र के गांवों को सुजानगढ़ में शामिल करने का मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है।
हरदयाल रुलानिया (प्रशासक)
ग्राम पंचायत आसोटा, लाडनूं।
सुजानगढ़ पेराफेरी क्षेत्र के संबंध में जिला कलेक्टर को फाइल भेजकर मार्गदर्शन चाहा गया है।