भगवान राधागोपीनाथ जी को निकुंज में जल विहार करवाया


महेंद्र खडोलिया
श्रीमाधोपुर (नवयत्न)। मंदिर श्री राधागोपीनाथ  में पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत चल रहे विभिन्न भक्तिमय दिव्य महोत्सवों में नवें दिवस को व्यास पीठाचार्य श्री प्रयागदासजी महाराज के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा मे भगवान पृथू का चरित्र, दश प्रचेताओं की कथा, भगवान ऋषभदेव का वर्णन, भगवान ऋषभ देव के पुत्र भरत और तीन अन्य भरतो, जिसमें प्रथम भगवान ऋषभ के पुत्र भरत ,द्वितीय राजा भरत एवं तृतीय जड़ भरत के चरित्र एवं रघूगण की पावन कथा सुनाई गई तत्पश्चात रात्रि में राम चरित्र मानस में भगवान राम और माता जानकी के विवाह, जनकपुर नगरी से माता जानकी की विदाई की कथा का रस और भावमय गान किया गया। प्रातः काल वृहत नारदीय पुराण में वर्णित पुरुषोत्तम महात्म्य कथा में पंडित सुरेश मिश्रा द्वारा मलमास को पुरुषोत्तम मास नाम दिये जाने की कथा व माहत्म्य पर विस्तृत चर्चा की गई। महंत डॉ मनोहर शरण दास जी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन भगवान के मंगल अलौकिक स्वरूप का श्रृंगार एवं दशमी तिथि को सायं निकुंज जल विहार मे ठाकुर जी को  विराजमान किया गया है।मन्दिर में प्रतिदिन दोपहर में 2:30 बजे से 6 बजे तक भागवत कथा का आयोजन, संपूर्ण दिवस हरिनाम संकीर्तन, प्रात श्री वृहद् नारद पुराण की पुरुषोत्तम मास महात्म्य कथा एवं रात्रि 8 से 10 बजे तक  रामचरित्र मानस के मास पारायण पाठ व राम कथा का कार्यक्रम मंदिर मे आयोजित हो रहा है। पुरुषोत्तम मास में हरी नाम संकीर्तन का बहुत ही अद्भुत एवं दिव्य महत्व बताया गया जिसके अंतर्गत मंदिर प्रांगण में मंगला आरती से शयन आरती पर्यन्त  भक्तों के द्वारा हरे कृष्ण महामंत्र के साथ भगवान की प्रदक्षिणा सतत् रूप से प्रतिदिन की जा रही है। जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तों की श्रद्धा और समर्पण का  भक्तिमय स्वरूप देखने को मिल रहा है।
You might also like