झुंझुनूं की पढ़ाई देखने पहुंचे उद्योगपति अजय पीरामल, बोले – यहां के नवाचार देश के लिए बन सकते हैं मिसाल

सुरेंद्र शर्मा
झुंझुनूं (नवयत्न)। बगड़ के मूल निवासी और उद्योगपति अजय पीरामल मंगलवार को जिले के दौरे पर रहे। उन्होंने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) पहुंचकर शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों और पीरामल फाउंडेशन की टीम से करीब सवा घंटे बंद कमरे में चर्चा की । इस दौरान जिले में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के क्रियान्वयन, स्कूलों में हो रहे नवाचार और शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों की जानकारी ली। डाइट पहुंचने पर प्राचार्य सुमित्रा झाझडिय़ा, जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र खीचड़, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी राजेश हलवान, प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार, दीपेंद्र बुडानिया, प्रतिभा न्यौला, राजबाला और संस्थापन अधिकारी विक्रम शेखावत सहित अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान ओसवाल ग्रूप के उद्योगपति रामदेव अग्रवाल और सुनीता अग्रवाल भी मौजूद रहे।
रिसोर्स सेंटर का किया अवलोकन
पीरामल ने शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने डाइट परिसर में विकसित 21वीं सदी की दक्षताओं पर आधारित रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर का भी अवलोकन किया। यहां संचालित गतिविधियों की जानकारी लेने के साथ उन्होंने नवाचारों की सराहना की।
अजय पीरामल ने कहा कि झुंझुनूं में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम हो रहा है। शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और डाइट स्टाफ के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने एनईपी-2020 को प्रभावी तरीके से लागू करने के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि झुंझुनूं में हो रहे नवाचार भविष्य में राजस्थान ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीरामल परिवार लंबे समय से सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है। वर्ष 2008 से पीरामल फाउंडेशन के माध्यम से इन प्रयासों को व्यापक रूप दिया गया है। झुंझुनूं में शिक्षा विभाग और फाउंडेशन के बीच बने सहयोगात्मक मॉडल पर उन्होंने संतोष जताया।
2500 शिक्षकों को हर साल प्रशिक्षण
डाइट प्राचार्य सुमित्रा झाझडिय़ा ने बताया कि संस्थान में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से एनईपी-2020 की अवधारणाओं के अनुरूप रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर के रूप में काम किया जा रहा है। पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने, विद्यार्थियों के कौशल विकास, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य और उनके समग्र विकास पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष करीब 2,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया था। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी करीब 2,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। प्रशिक्षण के बाद स्कूलों में जाकर यह भी देखा जाता है कि शिक्षक प्रशिक्षण में सीखी बातों को कक्षा में किस तरह लागू कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और शिक्षकों की सक्रियता उत्साहजनक है। हालांकि स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों और प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा अभी भी चुनौती बनी हुई है।
झुंझुनूं के कई नवाचारों की चर्चा
प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार ने बताया कि डाइट में बाल संसद पुस्तिका, ‘गागर में सागर’ पहल, प्रभावी प्रार्थना सभा और ‘हम होंगे कामयाब’ मोटिवेशनल सेमिनार जैसे नवाचार चलाए जा रहे हैं। 21वीं सदी के कौशलों पर आधारित रिसोर्स एवं वेलनेस सेंटर भी इनमें प्रमुख है। इन नवाचारों को देखने के लिए हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, उदयपुर सहित विभिन्न स्थानों की डाइट टीमें अध्ययन भ्रमण कर चुकी हैं। प्रभागाध्यक्ष दीपेंद्र बुडानिया ने कहा कि अजय पीरामल का दौरा शिक्षा विभाग और पीरामल फाउंडेशन की टीम के लिए प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ब्लॉकों के शिक्षा अधिकारी, शिक्षक, डाइट स्टाफ और पीरामल फाउंडेशन की टीम मौजूद रही।

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