भिर्र में हर सुबह दौड़ता है देश सेवा का जुनून

अशोक राईका
झुंझुनूं (नवयत्न)। झुंझुनूं की पहचान सैनिकों और शहीदों की धरती के रूप में है। इसी सैन्य परंपरा को बुहाना क्षेत्र का भिर्र गांव आज भी आगे बढ़ा रहा है। हर घर में फौज में जाने का जज्बा हैं। गांव में दर्जनों ऐसे परिवार हैं, जिनकी चौथी- तीसरी पीढ़ी देश की सेवा कर रही हैं। फौज से रिटायर सुबेदार जयपाल सिंह के अनुसार गांव में करिब एक हजार घर हैं। लगभग दो हजार 300 फौजी हैं। एक हजार 200 आर्मी में ऑन ड्यूटी व 1100 रिटायर्ड हैं। गांव के खेल मैदान में हर सुबह देश सेवा का सपना लिए युवा पसीना बहाते नजर आते हैं। कोई 1600 मीटर दौड़ की तैयारी करता है तो कोई अग्निवीर और टीए भर्ती के लिए खुद को तैयार कर रहा है। युवाओं की तैयारी सुबह करीब 5 बजे शुरू हो जाती है। करीब साढ़े चार बजे उठकर युवा मैदान में पहुंचते हैं। वार्मअप के बाद रनिंग, पेस और अलग-अलग शारीरिक अभ्यास करवाए जाते हैं। युवाओं को प्रशिक्षण देने वाले भी गांव के पूर्व सैनिक विकास मान हैं, जो अपने अनुभव के आधार पर उन्हें सेना भर्ती की शारीरिक परीक्षा के लिए तैयार कर रहे हैं।


युवाओं का मुफ्त में कर रहे ट्रेंड
सेना से रिटायर होने के बाद हवलदार विकास मान गांव के युवाओं का ग्रुप बनाकर ट्रेंड करते आ रहे हैं। यह सेवा बिल्कुल मुफ्त हैं। विकास गांव के खेल मैदान में सुबह पांच बजे से सात व शाम को पांच से छह बजे तक युवाओं को दौड़, विभिन्न प्रकार के व्यायाम कराते हैं। विकास ने बताया की हाल ही में 10 युवा अग्निवीर में भर्ती हुए हैं।
युवाओं का लक्ष्य- तिरंगे की शान के लिए सेना में जाना
इस गांव में कई ऐसे युवा हैं, जिनके दादा भूतपूर्व सैनिक हैं तो पिता सेना में कार्यरत। अब तीसरी पीढ़ी सैनिक बनने की कोशिश में हैं। भिर्र के युवा सनी, रॉबिन, आलोक, राहुल, अरमान का कहना है कि सेना में भर्ती होना उनके लिए सिर्फ रोजगार हासिल करना नहीं है। उनका सपना सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना है। यही सपना उन्हें हर सुबह मैदान तक लेकर आता है और घंटों मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है।
हर परिवार में सेना की वर्दी बनी प्रेरणा
भिर्र गांव में सेना में जाने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है। कई परिवारों में पिता, दादा और अन्य परिजन सेना से जुड़े रहे हैं। ऐसे में गांव के युवाओं के लिए सेना की वर्दी केवल नौकरी का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मान और गौरव का प्रतीक है।

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