जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन मनाने पर कार्यशाला आयोजित

श्रीराम तिवाड़ी
नोखा (नवयत्न)। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देश पर तेरापंथ युवक परिषद नोखा द्वारा रविवार को तेरापंथ भवन में जैन संस्कार विधि से मनाएं रक्षाबंधन विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य परिवारों में धार्मिक एवं पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को जैन संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना रहा। कार्यशाला का शुभारंभ जैन संस्कारक गोपाल लूणावत, हंसराज भूरा एवं निर्मल चौपड़ा ने जैन संस्कार विधि के अनुसार किया। इस अवसर पर उपासक एवं संस्कारक राजेंद्र सेठिया ने अपने उद्बोधन में जैन संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए परिवार एवं समाज में संस्कारों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उपासक धीरेन्द्र बोथरा ने भी जैन संस्कारों की महत्ता बताते हुए इन्हें दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। जैन संस्कारक गोपाल लूणावत ने रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी जैन कथा के माध्यम से पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझाया। वहीं जैन संस्कारक हंसराज भूरा ने जैन संस्कार विधि के अनुसार रक्षाबंधन मनाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी और इसके पीछे निहित धार्मिक भावनाओं एवं परंपराओं को सरल तरीके से समझाया। कार्यशाला में तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष गजेंद्र पारख, ज्ञानशाला प्रशिक्षिका राजकुमारी मरोठी, रेखा सेठिया, सरिता बैद, सोनू बोथरा एवं ज्ञानशाला प्रभारी महावीर नाहटा सहित परिषद के सदस्य, महिला मंडल की सदस्याएं, ज्ञानशाला के प्रशिक्षक तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों एवं युवाओं की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। कार्यशाला के माध्यम से उन्हें अपनी धार्मिक परंपराओं को समझने और आने वाली पीढ़ी तक संस्कारों को पहुंचाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम परिवारों में धार्मिक एवं पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के समापन पर तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष गजेंद्र पारख ने जैन संस्कारकों, श्रावक-श्राविकाओं, महिला मंडल, ज्ञानशाला, प्रशिक्षकों एवं सभी सहयोगी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता से आयोजित ऐसे कार्यक्रम समाज में संस्कारों को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यशाला में परिषद सदस्यों, महिला मंडल, ज्ञानशाला एवं श्रावक समाज की सक्रिय भागीदारी रही और कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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