टांई की शर्मनाक तस्वीर : गंदे पानी में फंसी अंतिम यात्रा, शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाना पड़ा

निसं
बिसाऊ (नवयत्न)। एक इंसान की जिंदगी का अंतिम सफर सम्मान के साथ पूरा हो, हर परिवार की यही इच्छा होती है। लेकिन टांई गांव में श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता पिछले करीब 11 साल से गांव के गंदे पानी की समस्या से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अब अंतिम शवयात्रा भी गंदे पानी और कीचड़ के बीच से निकालनी पड़ रही है। रविवार को टांई निवासी सोनिया पत्नी देवकरण स्वामी का असामयिक निधन हो गया। परिवार और ग्रामीण जब अंतिम संस्कार के लिए शव को मोक्षधाम ले जाने लगे तो श्मशान जाने वाला मुख्य रास्ता गंदे पानी से लबालब मिला। रास्ता अवरुद्ध होने के कारण शव को कंधे पर ले जाना संभव नहीं हुआ। मजबूरी में शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर गंदे पानी से होकर मोक्षधाम तक ले जाया गया। सोनू उपाध्याय, कृष्ण भार्गव, शंभू जोशी, वीरेन्द्र तंवर, अक्षय स्वामी, प्रभु सैन, रणवीर हाड़ा, जुगल प्रजापत, श्रवण सेन, विनोद सैनी, राजेन्द्र, भक्त सिंह, सुरेश शर्मा, शिव कुमार जोशी, बजरंग धाबाई सहित ग्रामीणों ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए कलेक्टर और जिला प्रभारी मंत्री से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था कर श्मशान जाने वाले रास्ते को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।
घुटनों तक गंदे पानी से होकर गुजरे ग्रामीण
अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों को भी घुटनों तक भरे गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते से पहले भी कई शवयात्राएं ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऊंटगाड़े और कंधे के सहारे निकाली जा चुकी हैं। गांव में आम लोगों की आवाजाही भी इसी समस्या के कारण प्रभावित है।
नाला बनाया, लेकिन चौक होने से नहीं हुआ पानी का निकास
ग्रामीणों के अनुसार समस्या के समाधान के लिए पंचायत प्रशासन की ओर से नाला भी बनाया गया था, लेकिन नाला चौक होने के कारण गांव के गंदे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। पानी आगे निकलने के बजाय श्मशान जाने वाले रास्ते पर ही जमा हो जाता है। लंबे समय से जमा पानी में बदबू फैल रही है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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