दादी के दरबार जाने वाले रास्ते पर गंदगी से ‘स्वागत’
संजय सोनी
झुंझुनूं (नवयत्न)। विश्व प्रसिद्ध दादी राणी सती मंदिर झुंझुनूं की पहचान है। 11 सितम्बर को भादव अमावस्या के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले प्रवासी जन बड़ी संख्या में दादी के दरबार में पहुंचेंगे। लेकिन मंदिर की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग का मौजूदा हाल शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मार्ग पर जगह-जगह सड़ांध मारते गंदगी के ढेर पड़े हैं और उन्हीं ढेरों में गोवंश प्रतिबंधित पॉलीथिन सहित कचरा खाकर अपना पेट भरने को मजबूर है। दादी राणी सती मंदिर जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नियमित सफाई के दावों के बावजूद गंदगी के ढेर नजर आ रहे हैं। कचरे से उठती दुर्गंध राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। आने वाले दिनों में जब भादव अमावस्या पर श्रद्धालुओं और प्रवासी जनों की भीड़ उमड़ेगी, तब यही गंदगी शहर की छवि पर सवाल खड़े करेगी।
गौशाला भी इसी मार्ग पर, फिर गोवंश क्यों खा रहा कचरा?
विडंबना यह है कि लाखों रुपए का सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाली गौशाला भी इसी मार्ग पर स्थित है। इसके बावजूद सडक़ किनारे पड़े कचरे में गाय और गोवंश प्रतिबंधित पॉलीथिन और अन्य कचरा खाते दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि जब गोवंश संरक्षण के लिए सरकार और संस्थाओं द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं तो खुले में पड़े कचरे से गोवंश को बचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

शवयात्रा भी इसी रास्ते से, नाक पर रुमाल बांधने की मजबूरी
इसी मार्ग से बिबानी मोक्षधाम जाने वाली शवयात्राएं भी गुजरती हैं। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को सड़ांध के बीच नाक पर रुमाल बांधकर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। जन्म से मृत्यु तक शहर की व्यवस्था से जुड़ा यह मार्ग आज गंदगी और दुर्गंध की तस्वीर पेश कर रहा है।
स्वागत द्वार के पास ‘स्वागत’ करती गंदगी
इसी माह मार्ग के दोनों छोर पर लगाए गए स्वागत द्वारों का विधायक राजेंद्र भाम्बू ने उद्घाटन किया था। विडंबना देखिए कि आज उन्हीं स्वागत द्वारों की नाम पट्टिका के आसपास गंदगी के ढेर पड़े हैं और गाय-गोवंश उन्हीं कचरे के ढेरों में मुंह मारते नजर आ रहे हैं। जिस मार्ग से बाहर से आने वाले लोगों का स्वागत होना है, वहां गंदगी शहर का परिचय बनती दिखाई दे रही है।
करोड़ों की स्वच्छता व्यवस्था, फिर सफाई कौन देख रहा?
राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छता के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। नगर परिषद की सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारी और संसाधन भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यदि शहर के प्रमुख धार्मिक और अंतिम संस्कार स्थल को जोडऩे वाले मार्ग पर समय पर सफाई नहीं हो रही है तो सबसे बड़ा सवाल सफाई से ज्यादा मॉनिटरिंग व्यवस्था पर है। सवाल यह है कि नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों द्वारा समय पर सफाई की जा रही है या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? यदि मॉनिटरिंग हो रही है तो फिर यह अव्यवस्था जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आ रही?
जन्मभूमि बुलाती है, बदले में बदबू क्यों?
देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे झुंझुनूं के प्रवासी जब भादव अमावस्या पर अपनी जन्मभूमि लौटेंगे तो उनके मन में अपने शहर और दादी राणी सती के प्रति आस्था होगी। जन्मभूमि की मिट्टी उन्हें यहां खींचकर लाएगी, लेकिन यदि स्वागत में उन्हें सड़ांध और कचरे से भरा रास्ता मिले तो यह शहर के लिए चिंतन का विषय है। प्रवासियों को जन्मभूमि की मिट्टी की खुशबू चाहिए, बदले में बदबू नहीं। अब देखना यह है कि भादव अमावस्या से पहले नगर परिषद इस मार्ग को वास्तव में साफ कर पाती है या फिर गंदगी ही श्रद्धालुओं का ‘स्वागत’ करती रहेगी।
आस्था, शिक्षा, खेल और अंतिम संस्कार स्थलों से जुड़ा है क्षेत्र
यह क्षेत्र शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सेठ मोतीलाल कॉलेज, राणी सती मंदिर, बिबानी मुक्ति धाम श्मशान, ईदगाह-कब्रिस्तान, मनसा माता मंदिर, राजस्थान की खूबसूरत गौशाला और बच्चों व युवाओं के खेलने हेतु बड़ा स्टेडियम स्थित हैं। ऐसे में पूरे क्षेत्र को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि पूरे शहरवासियों की भी जिम्मेदारी है। विशेष रूप से प्रशासन को इस पूरे क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए। यहां कचरा जमा न हो, गंदगी और दुर्गंध की स्थिति पैदा न हो तथा आने-जाने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए नियमित सफाई के साथ स्थायी निगरानी व्यवस्था जरूरी है। यह क्षेत्र धार्मिक आस्था, शिक्षा, खेल, सामाजिक गतिविधियों और अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को जोड़ता है। इसलिए इसकी स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना पूरे शहर की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन को भी इसे सामान्य क्षेत्र न मानकर विशेष निगरानी वाले क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहिए।