यही अवसर है … एक वोट तय करेगा अगले 5 साल!

यही अवसर है … 

मतदान दिवस के दिन अवकाश रहेगा परंतु इसे सैर सपाटे या पूरे दिन घर पे पड़े रहने वाली छुट्टी मत समझिएगा, मतदान करने अवश्य जाना है।

 

मेरे एक वोट न देने से क्या ही हो जाएगा ऐसा सोचने वाले आलसियों से कहना है ….

 

बाइक ले के रोड पे निकलो ओर आगे चलती गाड़ी के बीच से निकले 10 इंच धसे सीवर में या 10 इंच बाहर निकले सीवर चैंबर से भीड़ के धम्म से गिरो ओर कुछ कहने को मुंह खुले तो गाली मत देना,

 

सीवर व नालियों से निकलते बदबूदार पानी के पास से नाक पे रुमाल रख के सांस रोक के गुजरो तो बुदबुदाना मत,

 

अवारा पशु से सामना हो जाए या गंदगी के ढेर लग जाए आप साइड से निकल जाना आपको क्या…

 

 

दिन में जलने वाली स्ट्रीट लाइट रात को बंद रहे तो …

तो क्या आपको कौनसा रात को बाहर निकलना है ,आप तो वोट डालने दिन में ही नहीं निकले थे…..

 

 

शिकायत करने का अधिकार तभी सार्थक है, जब जिम्मेदारी निभाने का साहस भी हो ।

 

 

किसी योग्य को चुन कर सकारात्मक परिवर्तन व विकास को गति देने की क्षमता रखने वाले आप, मतदान न करके या दबाव में मतदान कर के किसी अयोग्य को पद पर बैठने का रास्ता देते है फिर अगले 5 साल किंकर्तव्यविमूढ़ आप सरकार व नेताओं को कोसते रहते है।

 

इसलिए वोट देने अवश्य जाइए 

 

_क्योंकि यही अवसर है_ 

 

अपने क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने का, क्षेत्र को विकसित करने का , बुलाइए अपने नेता को ओर अवगत करवाइये उन्हें अपनी समस्याओं से ।

जाति ,रिश्ते , किसी भी दबाव प्रलोभन से मुक्त होकर केवल इन्हीं मुद्दों पर वोट दीजिए और एक ऐसा नेता चुनिए जो बाद में भी जनसेवक कहलाना पसंद करे ,सुयोग्य व कर्मठ प्रचार के परचो में नहीं धरातल पे हो।

तभी एक आदर्श लोकतंत्र की स्थापना में जिम्मेदार नागरिक की भूमिका सार्थक हो पाएगी।

 

 

शिव आनन्द शर्मा 

दैनिक नवयत्न 

झुंझुनूं

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