17 किलोमीटर की पेयजल पाइपलाइन, फिर भी प्यासे गाजुवास-गड़ाना के ग्रामीण
सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न)। तारानगर से गाजुवास तक लगभग 17 किलोमीटर लंबी सार्वजनिक पेयजल पाइपलाइन होने के बावजूद गाजुवास एवं गड़ाना के ग्रामीणों को पर्याप्त और नियमित पेयजल नहीं मिलने का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। घरों तक पानी नहीं पहुँचने से ग्रामीणों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है, कि मुद्दा केवल पाइपलाइन में पानी छोड़ने का नहीं, बल्कि प्रत्येक घर और पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पर्याप्त मात्रा एवं उचित दबाव के साथ पानी पहुँचने का है। ग्राम गाजुवास निवासी प्रभुदयाल पुत्र रामकरण सहारण एवं पुरखाराम पुत्र सहीराम ने इस व्यापक जनसमस्या को लेकर पहले 05 सितंबर 2026 को विस्तृत ज्ञापन पंजीकृत डाक से भेजा, जो 07 सितंबर को संबंधित विभाग को प्राप्त हुआ। अपेक्षित स्थायी समाधान नहीं होने पर 21 सितंबर 2026 को पुन: ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा अधिवक्ता के माध्यम से अंतिम कानूनी नोटिस भी जारी किया गया। ज्ञापन एवं नोटिस में तारानगर से गाजुवास तक संपूर्ण पाइपलाइन की प्रारंभिक बिंदु से अंतिम छोर तक तकनीकी एवं भौतिक जाँच करवाने की मांग की गई है। इसमें वास्तविक जलप्रवाह एवं दबाव की जाँच के साथ पाइपलाइन में संभावित अनधिकृत कट, बाईपास, अतिरिक्त शाखा, अवैध वाल्व, पाइप काटकर पानी निकालने अथवा अन्य तकनीकी छेड़छाड़ की जांच की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही पाइपलाइन से जुड़े प्रत्येक कनेक्शन का विभागीय अभिलेखों से सत्यापन करने, आवेदन, स्वीकृति, शुल्कध्रसीद एवं उपभोक्ता रिकॉर्ड की जाँच करने तथा जाँच में अनधिकृत पाए जाने वाले कनेक्शनों को नियमानुसार हटाने की मांग की गई है। साथ ही किसी व्यक्ति को बिना जाँच दोषी न मानते हुए कार्रवाई केवल अभिलेख एवं तकनीकी जाँच के आधार पर करने की बात कही गई है। मामले में केवल जलापूर्ति ही नहीं, बल्कि तारानगर से गाजुवास तथा गाजुवास-गड़ाना में डाली गई पाइपलाइन की गुणवत्ता एवं तकनीकी स्थिति की निष्पक्ष जाँच की मांग भी उठाई गई है। यदि जाँच में पाइप अथवा सामग्री स्वीकृत मानकों के विपरीत पाई जाती है तो उसे नियमानुसार बदलवाने तथा जाँच से किसी ठेकेदार, फर्म, अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य उत्तरदायी व्यक्ति की भूमिका स्थापित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जाँच केवल कागजों तक सीमित न रहे। स्वीकृत योजना, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, ड्राइंग, माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण-पत्र, जलापूर्ति रिकॉर्ड, वाल्व संचालन रिकॉर्ड, कनेक्शन रजिस्टर एवं पूर्व शिकायतों सहित संबंधित अभिलेखों की जाँच कर मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर स्पष्ट रिपोर्ट तैयार की जाए। ज्ञापन एवं अंतिम कानूनी नोटिस में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, विभागीय मुख्य अभियंताओं, गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों, अधीक्षण अभियंता चूरू, अधिशाषी अभियंता तारानगर/संबंधित खण्ड, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, जिला कलक्टर चूरू एवं उपखण्ड अधिकारी तारानगर सहित संबंधित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया है। अंतिम कानूनी नोटिस में सात दिवस के भीतर प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। स्थायी समाधान होने तक गाजुवास एवं गड़ाना में टैंकर अथवा अन्य वैकल्पिक माध्यम से पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाने तथा जलापूर्ति का समय स्पष्ट करने की मांग भी रखी गई है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में वास्तविक एवं स्थायी समाधान नहीं किया गया तो प्रार्थीगण अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उचित रिट याचिका अथवा अन्य वैधानिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होंगे।