गाजुवास में समाधि भूमि का संकट, पुरानी समाधियों से बाहर निकल रहे अस्थि-अवशेष

सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न)। ग्राम गाजुवास में गुंसाईं (गोस्वामी) समाज की परंपरागत समाधि भूमि पूर्णत: भर जाने एवं पुरानी समाधियों से अस्थि-अवशेष बाहर निकलने की गंभीर समस्या को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी तारानगर को ज्ञापन सौंपकर लगभग 20 बीघा भूमि आवंटित करने की मांग की। ज्ञापन में बताया कि मोतीदादा की मेड़ी के पास वर्षों से उपयोग में आ रही लगभग 2-3 बीघा समाधि भूमि पूरी तरह भर चुकी है। समाज की धार्मिक परंपरा के अनुसार दिवंगत व्यक्तियों को समाधि दी जाती है, लेकिन नई समाधियों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होने से समाज की धार्मिक भावनाएं एवं पूर्वजों की गरिमा प्रभावित हो रही है। प्रतिनिधियों ने ग्राम गड़ाना की रोही अथवा ग्राम गाजुवास में उपलब्ध उपयुक्त भूमि का राजस्व अधिकारियों से निरीक्षण करवाकर, गोचर संरक्षण संबंधी कानूनी प्रावधानों की पालना करते हुए स्थायी समाधि स्थल हेतु भूमि आवंटन की मांग की। समाज ने सवाल उठाया कि जिस धरती में पीढ़ियों के पूर्वज समाधिस्थ हैं, उनके सम्मान की रक्षा कौन करेगा ? किसी समाज को अपने दिवंगत परिजनों के लिए दो गज सम्मानजनक भूमि भी न मिलना केवल जमीन का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय का गंभीर सवाल है। इस अवसर पर बार संघ अध्यक्ष एडवोकेट प्रभुदयाल सहारण, मूलचंद गोस्वामी, राहुल सहारण, मनोज राहड़, होशियारसिंह सहित समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन से तत्काल कार्यवाही कर स्थायी समाधि स्थल के लिए भूमि आवंटित करने की मांग की।

You might also like