अवैध खनन ने काट ‘ली’ जीवन रेखा अब

जय जांगिड़ 

झुंझुनू (नवयत्न)। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा 7 अप्रैल को पारित आदेश की पालना एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उदयपुरवाटी उपखंड अधिकारी व तहसीलदार को मांगपत्र सौंपा गया।

सरस्वती रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा संचालित ‘काटली नदी बचाओ जन अभियान’ के तहत प्रस्तुत ज्ञापन में काटली नदी, इसकी सहायक नदियों, नालों एवं अन्य जल स्रोतों की सुरक्षा एवं सीमांकन की माँग की गई।

अभियान के उदयपुरवाटी संयोजक दीपक मीणा बाघोली के अनुसार, काटली नदी के सहायक जल स्रोतों, नदी एवं नालों का सीमांकन कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा जल निकासी मार्गों को सुचारू किया जाए। इस संबंध में अभियान संयोजक सुभाष कश्यप के नेतृत्व में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

ज्ञापन में उदयपुरवाटी खंड के सुकली नदी (जहाज मावता), मोजिडा नाला, सांका वाला नाला, जोधपुरा नाला, सोकली नदी (सराय), सटिण्डा नाला सहित सभी जल स्रोतों की सुरक्षा की माँग करते हुए एनजीटी के आदेशों की प्रभावी पालना का आग्रह किया गया।

इस अवसर पर सतीश मिश्रा (छापोली), धर्मवीर यादव (मंडावरा), दीपक मीणा (बाघोली), करण तेतरवाल (पापड़ा), धन सिंह कश्यप (कीरपुरा), मोहर सिंह (ककराना), हरलाल सैनी, रविन्द्र सिंह, आनंद सिंह, मेघराज सैनी, प्रवीण सैनी, श्रवण कुमार, रणवीर सिंह, विकास भाकर, रामनिवास, रामजीवन गुप्ता, बनवारी कुमावत (धोलाखेड़ा), श्रवण सैनी, मदन खैरवा (धोलाखेड़ा), प्रभुदयाल, बृज मोहन सैनी सहित बड़ी संख्या में समर्थकों एवं बुद्धिजीवियों ने हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि क्षेत्र के सभी पटवारियों को निर्देशित कर काटली नदी के सभी सहायक जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति एवं अतिक्रमण की रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाए।

इसके अतिरिक्त, सिंधु जल को काटली नदी में लाने, नदी के समग्र विकास, पुनर्जीवन, संरक्षण एवं प्रभावित लोगों के पुनर्वास की भी मांग की गई। अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही प्रधानमंत्री से भेंट कर काटली नदी के पुनर्जीवन की मांग उठाई जाएगी।

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