जेजेटी विश्वविद्यालय में संकाय विकास कार्यक्रम से तीसरे दिन भी हुए लाभान्वित
निलेश मुद्गल
झुंझुनू (नवयत्न) । जगदीशप्रसाद झाबरमल टीबड़ेवाला विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का तृतीय दिवस शैक्षणिक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण, परिणाम-आधारित शिक्षा एवं शैक्षणिक नवाचार के माध्यम से उच्च शिक्षा का रूपांतरण” है।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. विनोद टीबड़ेवाला, कुलपति प्रो. मधु गुप्ता एवं कुल सचिव डॉ. अजीत कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को समकालीन शैक्षणिक दृष्टिकोण एवं नवाचारों से अवगत कराना है।
तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में चूरू स्थित राजकीय लोहिया पी.जी. महाविद्यालय से पधारे डॉ. सुमेर सिंह ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के क्रियान्वयन: चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों एवं उपलब्ध अवसरों का व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।

द्वितीय सत्र में रांची (झारखंड) के राजकीय महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. गणेश नारायण ने ऑनलाइन (ज़ूम माध्यम) से “राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के संदर्भ में परिणाम-आधारित शिक्षा एवं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने शिक्षण प्रक्रिया में परिणाम-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
तृतीय सत्र में उदयपुर स्थित भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय से संबद्ध डॉ. एन. के. पटेल ने भी ऑनलाइन (ज़ूम माध्यम) से “शोध की प्रक्रिया एवं प्रभावी शोध मॉडल का निर्माण” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध कार्य की रूपरेखा, पद्धति निर्धारण तथा मॉडल निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र कौशिक, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम समन्वयक डॉ. नाजिया हुसैन, सह- समन्वयक डॉ. नीतिश कुमार गौतम तथा छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. अनंता शांडिल्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस अवसर पर डॉ. नीरज, डॉ. दिनेश, डॉ. जगबीर, डॉ. विजयमाला, डॉ. रामप्रताप सैनी,डॉ. अंशु, डॉ. गुरफान, डॉ. रूमान, डॉ. महेश सिंह, डॉ. अंजना शर्मा, डॉ. अर्पणा, डॉ. केलापति एवं डॉ. शिव कुमार सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के तकनीकी सहयोग में राजेश साई, सुनील सैनी एवं अजय जांगिड़ का उल्लेखनीय योगदान रहा, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती पवार एवं डॉ. ज्योति सोनी द्वारा किया गया।