22 साल की उम्र में शहीद हुए छत्रपाल, 6 साल बाद भी स्कूल को नाम मिलने का इंतजार
अशोक राईका
झुंझुनूं (नवयत्न)। देश की रक्षा करते हुए महज 22 साल की उम्र में सर्वोच्च बलिदान देने वाले छावसरी गांव के शहीद छत्रपाल सिंह को उनकी ही धरती पर सम्मान दिलाने की मांग एक बार फिर उठी है। शहादत के करीब छह साल बीतने के बावजूद अब तक स्कूल का नाम उनके नाम पर नहीं हो पाया है। शहीद की जयंती 12 अगस्त को है। जयंती से ठीक पहले उनके पिता सुरेश पाल सिंह और माता शशि कला देवी पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी से मिले। इसके बाद चौधरी शहीद के माता-पिता को साथ लेकर जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग के पास पहुंचे और स्कूल का नाम अमर शहीद छत्रपाल सिंह के नाम पर करने की मांग रखी। जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने शहीद के माता-पिता और प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि स्कूल के नामकरण में आ रही समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने नियमानुसार नामकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। शहीद के माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा देश के लिए कुर्बान हुआ है। ऐसे में उसके नाम पर स्कूल का नामकरण होना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात होगी। छह साल से इस मांग के पूरा होने का इंतजार है। कलेक्टर से मुलाकात के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि अब प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पूर्व विधायक बोले— जरूरत पड़ी तो सरकार तक जाएंगे
पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी ने कहा कि शहीद छत्रपाल सिंह केवल अपने माता-पिता के बेटे नहीं थे, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश के बेटे थे। उन्होंने कहा कि स्कूल का नामकरण अब तक हो जाना चाहिए था। चौधरी ने बताया कि उन्होंने शहीद के माता-पिता के साथ कलेक्टर से मुलाकात कर नामकरण में आ रही समस्या की जानकारी ली है। जरूरत पडऩे पर सरकार और मुख्यमंत्री स्तर पर भी इस मामले को रखा जाएगा। उन्होंने जल्द नामकरण करवाने के लिए प्रयास जारी रखने का भरोसा दिलाया।
15 घंटे चली थी मुठभेड़, देश के लिए दे दी जान
छावसरी निवासी छत्रपाल सिंह भारतीय सेना में पैरा टूपर के रूप में तैनात थे। 5 अप्रैल 2020 को जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश के दौरान सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। करीब 15 घंटे चली इस मुठभेड़ में छत्रपाल सिंह शहीद हो गए। छत्रपाल शहादत से पांच साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने देश सेवा के लिए सेना का रास्ता चुना था। शहादत से पहले वे 29 दिन की छुट्टी पूरी कर 9 मार्च 2020 को ही ड्यूटी पर लौटे थे। उनका विवाह भी नहीं हुआ था।
12 अगस्त को जयंती, फिर उठेगा सम्मान का सवाल
छत्रपाल सिंह का जन्म 12 अगस्त 1997 को हुआ था। 12 अगस्त को उनकी जयंती पर गांव और क्षेत्र में उनके शौर्य एवं बलिदान को याद किया जाएगा। लेकिन इस बार जयंती के मौके पर एक सवाल भी सामने रहेगा—जिस जवान ने 22 साल की उम्र में देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, उसके नाम पर एक स्कूल का नामकरण करने में छह साल क्यों लग गए? शहीद परिवार अब प्रशासन के आश्वासन के बाद उम्मीद लगाए बैठा है कि उनके बेटे की स्मृति को स्थायी सम्मान देने की यह मांग जल्द पूरी होगी।