सैंकड़ों किसान प्रतिनिधियों ने किसान हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर की चर्चा
सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न)। तारानगर के जाट भवन में चल रहे अखिल भारतीय किसान सभा के 29वें राज्य-सम्मेलन में दूसरे दिन शनिवार को राज्य भर से आए सैंकड़ों किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किये गये हैं और किसानों और आम जनता के ज्वलंत मुद्दों को लेकर आंदोलन और संघर्ष की रूपरेखा तैयार की गई। सम्मेलन में आईजीएनपी, गंग केनाल, भाखड़ा, चम्बल आदि नहरी सिंचाई परियोजनाओं में सिंचाई क्षमताओं को बढ़ाने एवं पूर्वी राजस्थान नहरी सिंचाई परियोजना आदि अन्य परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने, बिजली निजीकरण बिल को रद्द करने एवं सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु कंपनियों द्वारा सरकारी एवं किसानों की कृषि भूमि को जबरदस्ती हड़पने एवं स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध करने, जोहड़, पायतन एवं अन्य भूमियों पर बसे किसान एवं गरीब परिवारों को आवासीय पट्टे देने, वीबी-जी रामजी योजना को रद्द करते हुये मनरेगा योजना को पुन: बहाल करने, शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ़ एवं स्कूलों में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियाँ करने आदि महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, फसलों का लाभकारी भाव देने, टे्रड डील पर रोक लगाने, सम्पूर्ण कर्जा माफी, फसल बीमा क्लेम, नहरों के निर्माण सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार को घेरा व इन्हें शीघ्र पूरा नही करने पर जन आंदोलन करने की चेतावनी दी गई। स्वागत समिति अध्यक्ष उमराव सहारण ने स्वागत भाषण देते हुए सभी का स्वागत किया। राज्य महासचिव छगन चौधरी ने पिछले राज्य सम्मेलन के बाद लगभग चार साल का रिपोर्ट कार्ड सम्मेलन के सामने रखा। सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद अमराराम, किसान सभा के राष्ट्रीय नेता पुष्पेन्द्र त्यागी, किसान सभा के राज्य संयुक्त सचिव डॉ संजय माधव, पूर्व विधायक बलवान पूनिया व किसान नेता निर्मल कुमार ने कहा कि किसान सभा ने हमेशा ही किसानों के हितों की लड़ाई लड़ी है और आगे भी लड़ती रहेगी। इस किसान विरोधी केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा। सम्मेलन में जिला अध्यक्ष इन्द्राज सिंह, मंगेज चौधरी, श्योपत मेघवाल, सागर खाचरिया, पूर्णाराम सरावग, चिमनाराम पांडर, एडवोकेट मुकेश शर्मा, रामनारायण रूलानिया, विक्रम सोनी, कांशीराम सहारण, सुशीला कंवर, भूमि बिरमी, सांवरमल मेघवाल, गौरीशंकर मांडिया, महेन्द्र, करतारसिंह, उमराव, छगन चौधरी आदि ने भी अपने विचार रखे एवं किसान हितों के लिए आंदोलन के लिए तैयार रहने की बात कही। संचालन रामकृष्ण छिंपा ने किया। सम्मेलन में सुनिल पारीक, सुमन प्रजापत, दाताराम भाकर, कांशीराम पूनिया, किशन शर्मा, नितेश उपाध्याय, कुनण बरोड़, अशोक शर्मा, विजय गोस्वामी, भालसिंह, भोजराज महला, सोनू जिलोवा, अजीत पूनिया, विकास पारीक, मोहम्मद सलीम, एडवोकेट नजीर लहंगा, मूनेश पूनिया सहित राज्य भर से आए अनेक किसान प्रतिनिधि, पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।