बच्चों को संस्कारों के साथ देशहित को प्राथमिकता का संदेश दें : श्रीकांत
सुरेंद्र शर्मा
झुंझुनूं (नवयत्न)। एसएस मोदी विद्या विहार में पं. दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केंद्र, जयपुर के क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्रीकांत रहे। विद्यालय समन्वयक मनीष अग्रवाल और प्राचार्य विजय मसीह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम् गान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्य वक्ता श्रीकांत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती है। हमें अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हिंदी बोलने और लिखने में भी लोग शुद्धता का ध्यान नहीं रखते। संस्कृत भी काफी हद तक मंत्रोच्चार तक सीमित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कार एक-दूसरे से जुड़े हैं। हमारी संस्कृति में गाली-गलौज का कोई स्थान नहीं है, इसलिए बच्चों को हमेशा शिष्ट और सौम्य भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जीवन में सबसे पहले राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। श्रीकांत ने कहा कि शिक्षक और माता-पिता बच्चों के भले के लिए ही मार्गदर्शन करते हैं, इसलिए उनका सम्मान करना चाहिए। शिक्षक-शिष्य संबंध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन को सही दिशा देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यार्थी विद्यालय में केवल किताबें पढ़ने नहीं, बल्कि जीवन को समझने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने आते हैं। विद्यालय समन्वयक मनीष अग्रवाल ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी विकसित हों और यह प्रयास लगातार जारी रहेगा। मुंबई प्रवासी ट्रस्टी शशिकांत मोदी, गीलुराम मोदी, सौरभ मोदी, प्रियंक मोदी और कनिका मोदी ने सेमिनार की सफलता पर शुभकामनाएं दीं।