बुहाना अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर फूटा गुस्सा, प्रदर्शन के बाद भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण

मधु दहिया
बुहाना (नवयत्न)। बुहाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के खिलाफ बुधवार को ग्रामीणों का आक्रोश सडक़ पर दिखाई दिया। सैकड़ों ग्रामीण अस्पताल के मुख्य गेट पर जुटे, नारेबाजी की और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधार की मांग की। दोपहर तक कोई सुनवाई नहीं होने पर आंदोलन और तेज हो गया। बुहाना के पवन सिंह तंवर व विजेंद्र तुदवाल भूख हड़ताल पर बैठ गए।

सूचना पर पहुंचे डिप्टी सीएमएचओ भंवरलाल, बुहाना बीसीएमओ जयवीर भगासरा धरना स्थल पहुंचे और समझाइश का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी लापरवाही कर्मचारीयों को तुंरत एपीओ करने और अन्य अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों ने डॉक्टर व स्टाफ द्वारा मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार करने, बाहर की दवाइयां ओर जांच लिखने के आरोप लगाए।

धरने पर कृष्ण कुमार, विजय जोशी, राजू बुहाना, सावन कुमार, संदीप सिंह, सोमवीर सिंह, दीपक सिंह, जयवीर, प्रदीप सिंह, नीतू वर्मा, विजेंद्र सिंह, बजरंगलाल, जयपाल, सूरज, रोशन, सचिन सिंह, लोकेश, नरेश, जयसिंह मौजूद रहे।

इलाज से पहले रेफर,  मरीज परेशान
ग्रामीणों का आरोप है कि बुहाना के सबसे बड़े अस्पताल में लंबे समय से सर्जन और लैब स्टाफ की कमी बनी हुई है। इसके कारण कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

अस्पताल में सुविधा, फिर भी बाहर से दवा और जांच
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अस्पताल में आवश्यक संसाधन होने के बावजूद मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने और निजी लैब में जांच कराने के लिए भेजा जाता है। उनका आरोप है कि इससे गरीब मरीजों पर अनावश्यक खर्च का बोझ बढ़ रहा है।

एम्बुलेंस, सफाई और कर्मचारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी
ग्रामीणों ने 104 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जरूरत के समय एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचती। अस्पताल परिसर में गंदगी, वार्डों की बदहाल स्थिति, डॉक्टरों और कर्मचारियों के समय पर नहीं आने तथा कुछ कर्मचारियों के मरीजों के प्रति व्यवहार को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई।

भूख हड़ताल से बढ़ा प्रशासन पर दबाव
मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से पवन सिंह तंवर और विजेंद्र तुंदवाल भूख हड़ताल पर बैठ गए। इसके बाद डिप्टी सीएमएचओ धरना स्थल पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। काफी देर तक चली समझाइश के बावजूद ग्रामीण मांग पूरी नहीं होने पर धरने पर बैठे रहने पर अड़े रहे। उनका कहना था कि केवल मौखिक भरोसे से अब काम नहीं चलेगा।

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