शिव पूजा के साथ सेवा और संयम का भी लें संकल्प – महंत स्वामी अवधेशाचार्य
सुमेर मीणा
उदयपुरवाटी (नवयत्न)। श्रावण मास में सोमवार का विशेष महत्व माना गया है। भगवान शिव को सोमवार का दिन प्रिय माना जाता है। ऐसे में सावन के सोमवार को श्रद्धालु शिव पूजा, जलाभिषेक और व्रत करते हैं। सूर्य मठ लोहार्गल धाम के पीठाधीश्वर महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि सावन सोमवार केवल पूजा-पाठ और मनोकामना का दिन नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और सदाचार अपनाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है। श्रद्धा और भक्ति से की गई साधना का विशेष महत्व है। शिव आराधना का उद्देश्य केवल मनोकामना पूरी करना नहीं, बल्कि मन को शांत और शुद्ध करना भी है। व्यक्ति को क्रोध, अहंकार, द्वेष और निंदा से दूर रहकर दया, क्षमा और करुणा का भाव अपनाना चाहिए।
जलाभिषेक और मंत्र जाप का महत्व
महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर ओम नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें। अपनी क्षमता के अनुसार अन्नदान, जल सेवा, गौ सेवा और जरूरतमंदों की मदद भी करनी चाहिए।
शिवभक्ति के साथ प्रकृति बचाने का संदेश
महंत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं से सावन में शिवभक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सावन हरियाली और प्रकृति से जुड़ा महीना है। इसलिए पौधे लगाना, पानी बचाना और जीव-जंतुओं की सेवा करना भी पुण्य कार्य है।
आचरण में दिखे शिवभक्ति’
मंहत स्वामी अवधेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि शिव की आराधना केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका असर हमारे व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। दया, सेवा, संयम और सदाचार को जीवन में अपनाना ही सावन सोमवार की सच्ची साधना है।