जागरूक झुंझुनूं अभियान के तहत दो सत्रों में हुआ स्पर्श.. सुरक्षित बचपन जागरूकता कार्यक्रम
अशोक राईका
झुंझुनूं (नवयत्न) । सुरक्षित बचपन, सजग किशोर, सशक्त युवा और स्वर्णिम भारत। इन्हीं भावों को साकार करते हुए मोदी वर्ल्ड स्कूल विज्डम सिटी में शनिवार को जागरूक झुंझुनूं अभियान के अंतर्गत एक भव्य एवं प्रेरणादायी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम दो विशेष सत्रों में सम्पन्न हुआ। जिसके प्रथम सत्र में विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, पीढिय़ों के अंतर, सकारात्मक सोच, सूचना एवं ज्ञान के अंतर, कृतज्ञता, जीवन में सफलता तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ जैन, जिले के प्रभारी सचिव सीनियर आईएएस अधिकारी नवीन जैन, कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग, डीईओ राजेन्द्र सिंह खीचड़ व डाइट के प्रभागाध्यक्ष प्रमेन्द्र कुल्हार सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों के पारंपरिक एवं आत्मीय स्वागत से हुआ। पधारे हुए विशिष्ट अतिथियों का तिलक, पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया गया। इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन डॉ. दिलीप मोदी, एमडी नीरजा मोदी, झुंझुनूं एकेडमी स्कूल डायरेक्टर आशुतोष मोदी, जॉली एंजल्स की डायरेक्टर रानू मोदी, मोदी वर्ल्ड स्कूल के निदेशक आकाश मोदी, क्रिएटिव डायरेक्टर गरिमा मोदी, हॉस्टल डायरेक्टर कुरड़ाराम धीवा, प्राचार्य डॉ. रविशंकर शर्मा एवं उप प्राचार्या सरोज सिंह, हैडमिस्ट्रेस उमा शर्मा, प्रशासक कमलेश कुलहरि, प्रिंसिपल जोगेन्द्र झाझडिय़ा, प्राचार्या आशा दडिय़ा राव, प्राचार्या मीनाक्षी शर्मा, उप प्राचार्या विमला झाझडिय़ा, शूरवीर एमडी अजीत, सैनिक हैड डीसी मीणा, रामस्वरूप झाझडिय़ा, हॉस्टल अधीक्षक महेश डूडी सहित विद्यालय प्रबंधन एवं प्रशासन के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पहले सत्र में बताया गुड टच बैड टच के बारे में
प्रथम सत्र में प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ जैन ने विद्यार्थियों से कार्यक्रम स्पर्श.. सुरक्षित बचपन में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए गुड टच एवं बैड टच के विषय में अत्यंत सरल, सहज एवं बाल-मित्रवत तरीके से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शरीर की सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं तथा असहज परिस्थितियों को पहचानने के प्रति जागरूक किया। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों को सार्वजनिक परिवहन, सार्वजनिक पार्क और सार्वजनिक शौचालय जैसी जगहों पर अकेले जाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि अपनी सुरक्षा के प्रति आवाज उठाना डर या कमजोरी नहीं, बल्कि साहस और आत्म-जागरूकता का परिचायक है। उनका संवाद विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा और उन्होंने बच्चों को स्वयं की सुरक्षा के प्रति सजग एवं आत्मविश्वासी बनने के लिए प्रेरित किया।
दूसरे सत्र में आईएएस नवीन जैन हुए रूबरू
द्वितीय सत्र कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। जिसमें आईएएस अधिकारी नवीन जैन ने किशोर विद्यार्थियों से बेहद आत्मीय और मित्रवत अंदाज में संवाद किया। उन्होंने अपने सत्र की शुरुआत एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न से की- क्या आप अपनी जिंदगी से खुश या संतुष्ट हैं? इस प्रश्न ने विद्यार्थियों को अपने जीवन, भावनाओं और भविष्य को लेकर आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित किया। नवीन जैन ने किशोरावस्था की उस उलझन को बेहद सहजता से समझाया। जब कभी कोई उन्हें बच्चा कहता है और कभी उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अब बच्चे नहीं रहे। इसी संदर्भ में उन्होंने पीढिय़ों के अंतर को समझाया और बताया कि अलग-अलग पीढिय़ों की सोच, अनुभव और अपेक्षाओं में अंतर स्वाभाविक है। उन्होंने संवाद, समझ और पारस्परिक सम्मान के माध्यम से इस अंतर को कम करने की प्रेरणा दी। विद्यार्थियों को सूचना और ज्ञान के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि आज के समय में जानकारी प्राप्त करना आसान है, लेकिन जानकारी को समझना, विभिन्न तथ्यों को आपस में जोडऩा और उनसे निष्कर्ष निकालना ही वास्तविक ज्ञान है। उन्होंने कोचिंग संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार विद्यार्थी प्रदर्शन के दबाव में सीखने की वास्तविक प्रक्रिया से दूर हो जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल परीक्षा और अंकों के लिए अध्ययन करने के बजाय विषयों को समझने, उनके बीच संबंध स्थापित करने और ज्ञान को जीवन में उपयोग करने का आग्रह किया। अपने प्रेरक संवाद में कृतज्ञता और कृतघ्नता के बीच का अंतर समझाते हुए विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, शिक्षकों, मित्रों तथा जीवन में मिले अवसरों के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा दी। वर्तमान डिजिटल युग की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति भी सजग किया तथा इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सावधानी, जिम्मेदारी एवं विवेक अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे और उनके ज्ञान, सोच, चरित्र एवं कर्मों से राष्ट्र का भविष्य निर्धारित होगा। वास्तव में आज युवा ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।