कोई भी भाषा मरती है तो उसके साथ पूरी संस्कृति मरती है- गर्ग
अमित प्रजापत
सुजानगढ़ (नवयत्न)। सुजला संस्थान की ओर से सोमवार को शहर की राजकीय गणेशीराम झंवर बालिका स्कूल में साहित्यकार डॉ. भंवर सिंह सामौर को सुजला गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग सहित अतिथियों ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा। प्रिंसिपल कुसुम शर्मा ने कार्यक्रम को अध्यक्षता की। कार्यक्रम में बीदासर की निवर्तमान प्रधान संतोष मेघवाल, साहित्यकार घनश्यामनाथ कच्छावा, समाजसेवी खड़ग सिंह बांठिया मंच पर मौजूद रहे। क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों, संस्थाओं और स्कूल के परीक्षा परिणाम में अच्छे अंक लाने वाली बालिकाओं को भी सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण में सम्बोधित करते हुए साहित्यकार घनश्याम नाथ कच्छावा ने कहा कि सामौर राजस्थानी भाषा के चलते फिरते पुस्तकालय हैं। राजस्थानी के लिए उनके योगदान और प्रयासों को कभी नहीं भुलाया जा सकता। सम्मानित हुए सामौर ने कहा कि कन्हैयालाल सेठिया की धरा सुजानगढ़ में उनके साहित्यिक जीवन की नींव पड़ी थी। क्योंकि उनकी स्कूली पढ़ाई यहीं पर हुई थी। उन्होंने सुजला संस्थान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश विदेश में कई सम्मान मिले। लेकिन अपने घर में सम्मानित होना बड़े गौरव का विषय है। सामौर ने राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने में हो रही देरी पर दुख भी जताया।
मुख्य अतिथि जागेश्वर गर्ग ने कहा कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलवाने की कोशिश की थी। लेकिन उस समय के कुछ साहित्यकारों ने ही इसमें रोड़ा अटका दिया। उन्होंने कहा कि हमारे राजनेताओं को अपनी भाषा में शपथ लेने में शर्म आती है। गर्ग ने कहा कि हमें अपनी भाषा और गर्व होना चाहिए और इसे मान्यता दिलवाने के लिए पुरजोर प्रयास होने चाहिए। संस्थान के अरविन्द विश्वेंद्रा ने बताया कि उनके दादा दिवंगत रामेश्वर लाल खटीक की स्मृति में यह पुरस्कार शुरू किया गया है। भंवर सिंह सामौर को उनकी उच्च स्तरीय साहित्यिक सेवाओं के चलते इस सम्मान के लिए चुना गया है। स्नेहप्रभा मिश्रा ने सम्मान पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम में प्रो. गीता सामौर, बुद्धिप्रकाश सोनी, दीनदयाल पारीक, वैद्य भंवरलाल शर्मा, श्याम स्वर्णकार, कन्हैयालाल स्वामी, दानमल भोजक, गिरधर शर्मा, महेश तंवर, बसन्त बोरड़, प्रेमप्रकाश स्वामी, कौशल्या गुलेरिया, शर्मिला सोनी, अनिल माटोलिया, सुरेश अरोड़ा, विश्वनाथ सामरिया, नानूराम खटीक, सुरेश सामरिया, मुकेश सामरिया, जितेन्द्र बागड़ी, श्रवण कुमार, जयराम, विक्रम, गोपाल, इन्द्र सामरिया, परमानंद मिश्रा, विनोद सेन, गणेश मंडावरिया, राजेश सेन, रेवंतमल पंवार, गणेश मंडावरिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। संचालन कवि हरिराम गोपालपुरा ने किया।