3 साल बाद खुली फाइल: अयोग्य नियुक्ति मामले में पूर्व अध्यक्ष व पति पुलिस रिमांड पर
संजय सोनी
झुंझुनू (नवयत्न) । बाल कल्याण समिति झुंझुनू की अध्यक्ष पद पर कथित रूप से अयोग्य नियुक्ति का मामला अब सामने आ गया है। करीब तीन साल पहले दर्ज एफआईआर में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समिति की पूर्व अध्यक्ष अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान अर्चना चौधरी को बाल कल्याण समिति झुंझुनू का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिसे प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समकक्ष अधिकार प्राप्त होते हैं। नियुक्ति के बाद ही आरटीआई कार्यकर्ता राजेश अग्रवाल ने उनकी योग्यता और पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए जून 2022 से लगातार शिकायतें की।
शिकायतों में आरोप था कि अर्चना चौधरी के खिलाफ जम्मू में आपराधिक प्रकरण दर्ज रहे हैं और उनके पास पद के लिए आवश्यक योग्यता भी नहीं है। लेकिन लंबे समय तक प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवादी ने न्यायालय की शरण ली, जिसके आदेश पर 10 जुलाई 2023 को कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान मामला एएसआई से लेकर सीआईडी-सीबी जयपुर के एएसपी स्तर तक पहुंचा। अंतिम जांच में आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोनों को दोषी मानते हुए कार्रवाई की गई।
प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी उजागर
पुलिस जांच में सामने आया कि अर्चना चौधरी द्वारा लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्र ‘वैध नहीं’ पाए गए। श्रीगंगानगर, मेरठ और झुंझुनू के स्कूलों के प्रमाण पत्रों में गंभीर विसंगतियां मिली। एक प्रमाण पत्र की अवधि के दौरान वह उच्च शिक्षा कर रही थी, जबकि अन्य प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड भी मेल नहीं खाया। कुल अनुभव निर्धारित मानकों से कम पाया गया, जबकि आवेदन में 10 वर्ष अध्यापन और 2 वर्ष प्रधानाचार्य अनुभव दर्शाया गया था।
जम्मू से छह मामलों का रिकॉर्ड मिला
जांच में जम्मू से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार अर्चना चौधरी के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें पांच धोखाधड़ी और एक चोरी से संबंधित था। हालांकि इन मामलों में दोष सिद्ध नहीं हुआ था।
विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
इस मामले को भाजपा विधायकों द्वारा राजस्थान विधानसभा में भी उठाया गया था। नियम 131 के तहत प्रश्न करते हुए नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़े किए गए, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई।
तीन साल तक चली जांच
मामले की फाइल तीन बार जयपुर और सीकर स्तर पर तलब हुई। विभिन्न अधिकारियों द्वारा जांच के बाद अंततः सीआईडी-सीबी ने कार्रवाई की अनुशंसा की, जिसके आधार पर अब गिरफ्तारी हुई है।
पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है, हालांकि मामले में अभी विस्तृत खुलासा नहीं किया गया है।