नशे और मादक पदार्थों की बढ़ती लत चिंता का विषय — बृजेंद्र सिंह ओला
संजय सोनी
झुंझुनू। (नवयत्न) | सांसद श्री बृजेंद्र सिंह ओला ने आज लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से देश में बढ़ती नशे और मादक पदार्थों की लत का मुद्दा उठाया।
सांसद ने कहा कि सरकार नशा मुक्त भारत के बड़े दावे तो करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर व्यवस्थाएँ अभी भी बेहद चिंताजनक हैं। सरकार के अनुसार देशभर में केवल 76 आउटरीच एंड ड्रॉप-इन सेंटर (ODIC) संचालित हो रहे हैं, जो देश की विशाल आबादी के मुकाबले बेहद कम हैं।
सरकार ने बताया कि नशे से पीड़ित लोगों के लिए 349 एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA) और 154 व्यसन उपचार सुविधाएँ सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।
सांसद ओला ने कहा कि बढ़ती समस्या के मुकाबले यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
पिछले पाँच वर्षों में नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर 2024-25 में लगभग 7.98 लाख लाभार्थियों को सहायता मिली है। जबकि यह संख्या वर्ष 2020 में 2 लाख के लगभग थी। यह संख्या यह भी दर्शाती है कि देश में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसके मुकाबले सरकार की तैयारियाँ अभी भी सीमित हैं।
सांसद ओला ने कहा कि केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। मेरी मांग है कि प्रत्येक जिले में पर्याप्त नशा मुक्ति व पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएँ, युवाओं में बढ़ती नशे व मादक पदार्थों की समस्या पर विशेष नीति बनाई जाए , मादक पदार्थों, नशीली दवाओं पर रोक तथा राज्यों के साथ मिलकर उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की मजबूत व्यवस्था विकसित की जाए।
देश के युवाओं को नशे और मादक पदार्थों, नशीली दवाओं की गिरफ्त से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।