अक्षय तृतीया पर ग्रामीण क्षेत्र में परंपराओं का उत्साह, महिलाओं ने निभाई पुरानी परंपरा

सुभाष वर्मा
तारानगर (नवयत्न) । तहसील के ग्रामीण क्षेत्र तोगावास तथा बुचावास में अक्षय तृतीया का पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए घर-आंगन में पूजा-अर्चना की।
इसी क्रम में तोगावास की एक महिला सुमन देवी पत्नी श्री अमरस्वरूप श्योराण ने परंपरागत तरीके से ओखली-मूसल (खल-बट्टा) के माध्यम से अनाज कूटने की पुरानी परंपरा को जीवित रखा। ग्रामीण परिवेश में इस तरह की गतिविधियाँ आज भी संस्कृति और परंपरा की झलक प्रस्तुत करती हैं।
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अक्षय (कभी समाप्त न होने वाला) माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस दिन विशेष रूप से खेती-बाड़ी, अन्न से जुड़ी परंपराएं और धार्मिक कार्य किए जाते हैं। गांव में इस पर्व के अवसर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखने को मिला और लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

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