किसान-मजदूर भवन का उद्घाटन, सभा में किसान-मजदूर एकता पर जोर

अशोक राईका
झुंझुनूं (नवयत्न)। साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के अवसर पर रविवार को अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से बाकरा रोड रेलवे फाटक के आगे नवनिर्मित किसान-मजदूर भवन का उद्घाटन किया गया। प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो. डॉ. घासीराम ने भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद किसान-मजदूर सभा आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. घासीराम ने की। मुख्य अतिथि भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि 9 अगस्त का दिन अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन और साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियों से किसान, मजदूर, आदिवासी और कमजोर वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने किसान-मजदूरों और वामपंथी संगठनों की एकजुटता को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं, आदिवासियों और छोटे दुकानदारों के संघर्षों को एकजुट करते हुए समानता पर आधारित समाज के लिए काम करना होगा। सभा को विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद कॉमरेड राजाराम सिंह, सांसद एवं माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड अमराराम, भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड प्रभात कुमार चौधरी, केंद्रीय कमेटी सदस्य फूलचंद ढेवा, पोलित ब्यूरो सदस्य संजय शर्मा, राजस्थान राज्य सचिव शंकरलाल चौधरी, पूर्व विधायक पेमाराम, राज्य सचिव किशन पारीक, फूलचंद बर्वर, विद्याधर गिल, बिड़दूराम सैनी, ओमप्रकाश झारोड़ा, रमेश चौधरी, रतनलाल पारीक, कैलाश यादव, पोकर सिंह झाझडिय़ा, चंद्रदेव ओला, सौरभ नरूका, इंद्राज सिंह चारावास, मनफूल सिंह और शीशराम गोठवाल सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं भाकपा माले के जिला सचिव रामचंद्र कुलहरि ने अतिथियों, किसान-मजदूरों और जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने किसान-मजदूर एकता को मजबूत करने और आगामी आंदोलनों को आगे बढ़ाने का संकल्प दिलाया। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा के जेल भरो आंदोलन में झुंझुनूं में भाग लेने का आह्वान किया।
किसान-मजदूरों के संघर्ष को मजबूत करेगा भवन
वक्ताओं ने कहा कि किसान-मजदूर भवन का निर्माण किसान और मजदूरों के संघर्षों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भवन के माध्यम से किसानों और मजदूरों के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों को लेकर गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वक्ताओं ने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने, कृषि संकट का समाधान करने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। साथ ही किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जनसंघर्ष तेज करने का आह्वान किया।

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