आत्मबोध से विश्वबोध.. विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन

 

अमित प्रजापत 

सुजानगढ (नवयत्न) । अखिल भारतीय साहित्य परिषद, सुजानगढ़ एवं सोना देवी सेठिया कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में -आत्मबोध से विश्वबोध.. विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। डॉ. साधना प्रधान जोशी जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुभाष पारीक, विशिष्ट अतिथि अरविंद मिश्र एवं मुख्य वक्ता वासुदेव चाकलान रतनगढ, प्राचार्या डॉ साधना सिंह, निर्देशिका डॉ वंदना भटनागर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन कर रही शिक्षाविद स्नेहप्रभा मिश्रा ने आयोजकीय पृष्ठभूमि को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता वासुदेव चाकलान ने कहा कि आत्मबोध एक आत्मविचार होना चाहिए। राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति को आत्म बोध को स्मृति में लाने के लिए काम करना चाहिए। जब मौन गहराता है तभी मनुष्य यह समझ पाता है कि यह चेतना है। मैं, तुम की सीमाएं जब टूटती हैं, तो विश्वबोध का आरंभ होता है। जिला पाठक प्रमुख अरविंद मिश्र ने बताया कि भारत एक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, यह चेतना आत्म बोध है और यह जब सर्वोच्च स्तर तक पहुंचती है तो हम विश्व बोध तक जाते हैं। मुख्य अतिथि सुभाष पारीक ने कहा कि संगठन हमारे आत्मबोध को जागृति प्रदान करते हैं और नवोदित प्रतिभाओं को निखरने का अवसर प्रदान करते है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ साधना प्रधान ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम तत्वबोध, आत्मबोध और फिर विश्वबोध तक जाएं तभी सफल होकर जीवन के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। अनेकता में एकता के ध्येय ने हमको आत्मबोध से विश्वबोध तक पहुंचाया है। कार्यक्रम में मदन गुर्जर सरल की -महकते मुक्तक एवं मेरी मनभावन गजलें.. पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन निदेशक डॉ वंदना भटनागर द्वारा किया गया। मंचस्थ अतिथियों का सम्मान डॉ. जय श्री सेठिया, डॉ मेघना सोनी, मोनिका शर्मा, कृष्णा पारीक, मीना पारीक, मंजुला चाकलान, परमानंद मिश्र एवं भंवरलाल गिलान ने किया। दो छात्राओं को उक्त विषय पर शानदार प्रस्तुतीकरण हेतु 500-500 रु की पुरस्कार राशि प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

 

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