व्यक्ति का चरित्र निर्माण ही समस्त धर्मों का मूल है – प्रो. कोठारी

नवरतन वर्मा
रतनगढ़ (नवयत्न)। विश्व के समस्त धर्मों का मूल व्यक्ति का चरित्र निर्माण है । ये विचार साहित्यकार प्रोफेसर कमल सिंह कोठारी ने अणुव्रत समिति द्वारा आयोजित अणुव्रत काव्य धारा आयोजन के मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। रतनगढ़ में जैन परिषद् भवन के सभागार में उपस्थित साहित्य प्रेमियों को व्यसनमुक्त जीवन का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ ही नहीं अपितु पद, धन और प्रसिद्धि आदि का नशा भी विनाशकारी होता है। साहित्य सरोवर संस्थान , जयपुर के सचिव वैद्य बालकृष्ण गोस्वामी के सान्निध्य में सम्पन्न कार्यक्रम मे जोधराज बैद , जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मोतीलाल तातेड़ एवं पूर्व प्राचार्य कल्याण सिंह चारण मंचस्थ अतिथि थे। गोस्वामी ने अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री को समर्पित कविता ” युगद्रष्टा श्री महाश्रमण मतिधीर , मनस्वी , उपकारी …. ” प्रस्तुत कर अणुव्रत अपनाने का आह्वान किया। प्रो कल्याण सिंह चारण ने रतनगढ़ की धरती को धर्म , अर्थ और साहित्य के संगम की धरा बताते हुए कहा कि अणुव्रत के विचार का बीजारोपण इसी पावन धरा से होना हमें गौरवान्वित करने वाला है। समिति अध्यक्ष कुलदीप व्यास की सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में युवा कवि मनोज चारण , आशु कवि अरविंद ” रत्नधरा” , कवयित्री भानुप्रिया शर्मा , दिलीप स्वामी ” मनु ” और प्रभात बील ने अणुव्रत आचार संहिता आधारित रचनाएं प्रस्तुत करते हुए पर्यावरण संरक्षण, हरीतिमा संवर्धन , व्यसनमुक्त जीवन और भ्रष्टाचार उन्मूलन संबंधी संदेश दिया। सेवा निवृत्त प्राचार्य राम गोपाल महर्षि ने आयोजन की समीक्षा करते हुये कहा कि हमारी प्रज्ञा का स्रोत , संस्कृति विश्व में अनूठी है। इसका मूल ध्येय है चारित्रिक उन्नयन । समिति के उपाध्यक्ष अरुण रामगढ़िया , पूर्व अध्यक्ष तेजपाल सिंह गुर्जर , कोषाध्यक्ष राजकुमार बैद , सह मंत्री नरेंद्र सांकृत्य , रामचंद्र पारीक , दौलतराम दायमा , प्रताप बोथरा आदि ने अतिथियों का स्वागत शॉल, दुपट्टा , साहित्य और अणुव्रत डायरी भेंट कर किया । कवियों का अभिनंदन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया । इस अवसर पर परमेश्वर लाल आत्रेय , बद्री प्रसाद पारीक , पूनमचंद दूगड़ , बाबूलाल कोचर , मांगीलाल स्वामी , हनुमान सिंह , महावीर सेवदा , भानुप्रकाश इंदौरिया , हिमांशु मालपुरिया , गोपाल मुरारका ,पवन महर्षि आदि उपस्थित थे।

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